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दुनिया

रिएक्टरों के विरोध में राष्ट्रपति के साथ सोने को तैयार

मशहूर लेखिका शार्लोट रोशे राष्ट्रपति क्रिस्टियान वुल्फ के साथ सोने को भी तैयार हैं बशर्ते वह परमाणु रिएक्टरों की उम्र बढा़ने के बिल पर दस्तखत न करें. 32 साल की जर्मन लेखिका रिएक्टरों की उम्र बढ़ाने के खिलाफ हैं.

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रविवार को जर्मन पत्रिका डेअर श्पीगल को दिए एक इंटरव्यू में शार्लोट रोशे ने साफ कहा, "मैं उनके साथ सोने का प्रस्ताव देती हूं, अगर वह बिल पर दस्तखत न करें तो." शार्लोट ने यह भी कहा कि उनके पति को इसमें कोई एतराज नहीं है. उन्होंने कहा, "मेरे पति इस बात के लिए राजी हैं और अब राष्ट्रपति की पत्नी को इस बारे में फैसला करना है." इंटरव्यू में शार्लोट ने यह भी कह दिया कि उनके जिस्म पर टैटू बने हुए हैं.

Christian Wulff und Ehefrau Bettina

ब्रिटेन में जन्मीं रोशे की 2008 में आई किताब वेटलैंड्स काफी चर्चित रही. इसमें उन्होंने सेक्स के बारे में भी खुल कर लिखा है. पिछले हफ्ते परमाणु कचरे को जर्मनी लाए जाने के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में उन्होंने खूब बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. राष्ट्रपति को इस साल इस बात पर फैसला लेना है कि देश के 17 परमाणु रिएक्टरों की उम्र अगले 14 साल के लिए बढ़ाई जाए या नहीं. जर्मन संसद के ऊपरी सदन की सहमति के बगैर इस बात पर फैसला लिया जाना है.

इस योजना पर काफी विवाद है और इसके खिलाफ देश में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं. इस साल सितंबर में कैबिनेट ने जर्मनी को परमाणु बिजली से छुटकारा पाने के लिए 14 साल का और समय देने का फैसला किया था. इसका मतलब है कि 2035 तक इन बिजली घरों को बंद नहीं किया जाएगा.

शार्लोट के इस प्रस्ताव ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है. कुछ लोग इसे लोकप्रियता हासिल करने का सस्ता जरिया मान रहे हैं तो कुछ लोगों का यह भी कहना है कि राष्ट्रपति को इस तरह का अनैतिक प्रस्ताव देकर शार्लोट ने गुनाह किया है. हालांकि ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो मानते हैं कि शार्लोट परमाणु रिएक्टरों के विरोध का हर संभव तरीका अपना रही हैं और उन्होंने ठीक किया है.

राष्ट्रपति क्रिस्टियान वुल्फ या उनके दफ्तर की तरफ से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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