राहुल प्रियंका वोट नहीं मांगते | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 02.05.2014
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जर्मन चुनाव

राहुल प्रियंका वोट नहीं मांगते

राहुल गांधी दो बार से अमेठी के सांसद हैं. वह वोट नहीं मांगते. बहन प्रियंका प्रचार के लिए आती हैं तो वह भी वोट नहीं मांगतीं. इस बार सोनिया गांधी आईं तो उन्होंने भी वोट नहीं मांगे, कहा राहुल अमेठी को सौंप रही हूं.

अमेठी में सात मई को मतदान है. आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कुमार विश्वास 12 जनवरी से अमेठी में डेरा डाले हैं. लोगों से पूछते हैं राहुल गांधी का घर अमेठी में कहां है. भीड़ में से कोई बोल देता है 'अमेठी के दिल में'. हालांकि कुमार को शुरू में काफी समर्थन मिला था. उन्होंने भी दावा किया कि पूरा इलाका उन्होंने घूमा है. चाणक्यपुरी में राजर्षि चौराहे पर आप के दफ्तर में युवकों का आना जाना लगा है, अधिकांश दिल्ली के हैं.

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अमेठी में राहुल और प्रियंका गांधी

टीवी सीरियलों की तुलसी, बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी आठ अप्रैल से यहीं हैं. एक छोटे से होटल में बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के आने के पूरे 55 मिनट बाद पहुंची स्मृति रोड शो के लिए उन्हें लेकर निकलती हैं. सौ सवा सौ की भीड़ है. शाम का पारा भी 40 से कम नहीं, लेकिन नारों में गर्मी नहीं है. स्मृति के चेहरे पर चुनाव की जरा भी थकान नहीं दिखती. इस होटल के मालिक मदन मोहन राहुल गांधी से नाराज हैं पर बीजेपी से भी खुश नहीं, "ये लोग गंभीरता से चुनाव नहीं लड़ रहे वर्ना इस बार राहुल को हराना मुश्किल नहीं था."

उधर राहुल हैं, जो 12 अप्रैल को बहन प्रियंका के साथ धमाकेदार नामांकन के बाद से नदारद हैं. मतदान से पहले एक दो दिन के लिए आएंगे. पिछली बार भी नामांकन के बाद दो बार ही आए थे. साल में 14-15 बार आते हैं. जनता दर्शन लगाती है. एक एक से व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं. यही काम प्रियंका वाड्रा भी करती हैं. व्यक्तिगत रूप से मिलती हैं. सुरक्षा घेरा तोड़ कर एक बेहद लागर बुजुर्ग महिला के हाथ पकड़ उसे उठाने वाले अंदाज में मिलीं तो वह रोने लगी.

जगदीशपुर की सभा का सुरक्षा घेरा तोड़ मंच से उतर आईं, लोगों ने कहा दिख नहीं रहीं. भीड़ में आकर पूछा अब दिख रही हूं, जवाब मिला 'हां'. फिर पूछा राहुल अच्छा काम कर रहे हैं. जवाब मिलता है हां. वह आगे बढ़ती हैं. महोना, शुक्ल बाजार, मुसाफिर खाना की जनसभाओं में बोलीं कि राहुल बिल्कुल राजीव गांधी की तरह काम कर रहे हैं. अमेठी के विकास के लिए जो बन पड़ेगा वह जरूर करेंगे. प्रियंका ने अमेठी में इस बार एक हफ्ते भी प्रचार नहीं किया.

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लोगों में लोकप्रिय हैं प्रियंका गांधी

संजय गांधी के जमाने से कांग्रेस से जुड़े रहे अवधी लेखक जगदीश पीयूष इस सवाल पर हैरान हैं कि अमेठी कांग्रेस का अभेद दुर्ग क्यों है, "अरे क्या नहीं दिया गांधी परिवार ने अमेठी को. करीब 70 बैंक, 60 एटीएम, 30 डाकघर, अमेठी के सभी 16 ब्लॉक में मोबाइल अस्पताल, दो दर्जन ट्रेनों और नौ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ दिया अमेठी को, घर घर इंडिया मार्का हैंडपंप लग गए, मुंशीगंज में 350 बिस्तरों का देश का सबसे बड़ा ग्रामीण अस्पताल, इंदिरा गांधी नेत्र अस्पताल, अमेठी वाले नहीं जानते रसोई गैस की किल्लत, ये नहीं जानते वेटिंग टिकट पर चलना, जहां जाते हैं वीआईपी इलाज पाते हैं. इस ट्रीटमेंट के चलते उन्हें अब कोई और भाता ही नहीं."

क्या बदलाव की बात नहीं आती मन में. इस सवाल पर बोले, "पहले संजय गांधी फिर राजीव गांधी, फिर कैप्टन सतीश शर्मा और अब राहुल गांधी, पात्र बदलते रहे तो ऊब पैदा नहीं हुई. बदलाव होता रहा." कंप्यूटर स्कूल के प्रबंधक स्वामीनाथ बताते हैं कि साल में जब मन आता है शिरडी चले जाते हैं, टिकट कंफर्म कराने, रुकने और वीआईपी दर्शन का इंतजाम राहुल की टीम करती है. अमेठी के एक मुस्लिम युवक की खाड़ी के देश में मृत्यु हो गई. परिजनों ने राहुल से फरियाद की कि उसकी लाश मंगवा दें, राहुल ने तुरंत विदेश मंत्रालय फोन किया. इंतजाम हो गया. वह लोग दिल्ली गए लेकिन वहां से अमेठी तक लाने के भी पैसे नहीं थे. फिर राहुल को कहा, वहां से एम्बुलेंस मिल गई. ऐसे किस्से अमेठी में हर तरफ सुनने को मिल जाते हैं. भेल, इंडो गल्फ जैसे करीब 200 औद्योगिक यूनिट लगे हैं इस इलाके में.

अमेठी के दक्षिण में गोसाईंगंज, महाराजपुर, नरैनी, पूरबगांव, ककुवा, पियसिया, कोहरा, मुहम्मदपुर, भादर और टीकरमाथी इलाकों के लोग राहुल से नाराज हैं. राम स्नेही यादव राहुल का नाम सुनते ही बिदक जाते हैं. बीएसपी से डा. धर्मेंद्र हैं. हरि गौतम कहते हैं हर बार करीब सवा लाख वोट बीएसपी को मिलते हैं. लखनऊ से जगदीशपुर, शुक्ल बाजार, जामो, गौरीगंज होते हुए अमेठी तक जाने फिर मुंशीगंज से फुर्सतगंज होते हुए वापस लखनऊ आने में कहीं भी यूपी के दूसरे घोर अभावग्रस्त इलाकों जैसा अहसास नहीं होता है.

रिपोर्टः एस वहीद, अमेठी

संपादनः अनवर जे अशरफ

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