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दुनिया

'राहुल को बनाओ पीएम का दावेदार'

कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार राहुल गांधी होने चाहिए. भारत की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के दिग्गज नेता जयपुर के चिंतन शिविर में यही मांग कर रहे हैं. 42 साल के राहुल गांधी अब तक मंत्री भी नहीं रहे हैं.

कांग्रेस की वेबसाइट खोलते ही सबसे ऊपर तीन चेहरे दिखाई पड़ते हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी. पार्टी की वेबसाइट पर मनमोहन और सोनिया के साथ राहुल का इतनी प्रमुखता से होना पार्टी का इरादा जानने के लिए काफी है. पार्टी चाहती है कि राहुल प्रधानमंत्री बनें.

जयपुर में हो रहे चिंतन शिविर में भी इस बात की तसदीक हो रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने राहुल गांधी को 'वर्तमान और भविष्य का नेता' करार दिया. मोइली की तर्क का समर्थन वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने भी किया. अय्यर ने कहा कि राहुल को पार्टी पूरा समर्थन और सहयोग देगी.

पश्चिमी महाराष्ट्र से आने वाले कांग्रेसी नेता संजय निरूपम ने भी कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी से बड़े मंच पर आने का आग्रह किया. निरूपम ने खुला एलान किया, राहुल "2014 के चुनावों में हमारे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे."

राहुल लाएंगे जान

कांग्रेस के कई नेताओं को लग रहा है कि राहुल के आगे आने से पार्टी में नई जान आएगी. युवा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद भी ऐसी ही मांग कर रहे हैं. चिंतन शिविर में युवाओं को आगे लाने पर भी खासा जोर दिया जा रहा है, हालांकि ये मांग युवा नेता ही कर रहे हैं. राहुल अब तक संगठन और युवा इकाई में काम करते रहे हैं.

कांग्रेस भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है. हालांकि 1980 के दशक में इंदिरा गांधी की अगुवाई में कांग्रेस का विभाजन हुआ. चरखा चुनाव चिह्म वाली कांग्रेस (आर) कहलाई और इंदिरा गांधी वाली कांग्रेस (आई) बनी, इसका चुनाव चिह्न हाथ का पंजा बना.

वंशवाद की पार्टी

वर्तमान कांग्रेस इंदिरा गांधी की बनाई पार्टी है. वंशवाद के आरोपों से जूझने वाली कांग्रेस बीते चार दशकों में कमजोर पड़ी है. उसका बड़ा वोट बैंक छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों के हाथों में जा चुका है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, और गुजरात जैसे राज्यों से उसके पांव उखड़ गए हैं.

2004 से सत्ता पर बैठे 80 साल के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की छवि भी 2009 के बाद खासी गिरी है. आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने के अलावा मनमोहन सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं. मनमोहन सिंह को कमजोर प्रधानमंत्री बताया जा रहा है.

लेकिन क्या राहुल गांधी कांग्रेस का रामबाण हैं. आलोचक ऐसा नहीं मानते. आलोचकों के मुताबिक लंबे समय से राजनीति में रहने के बावजूद राहुल ने कभी बड़ी जिम्मेदारियां नहीं लीं. राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश करने की मांग के बीच वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ की एक टिप्पणी याद आती है. दो साल पहले भी जब कई कांग्रेसी नेता राहुल गांधी को किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे थे तब अपने कार्यक्रम में विनोद दुआ ने कहा कि, "गांधी परिवार का व्यक्ति कृषि मंत्री बनने के लिए राजनीति में थोड़े ही आता है."

कमजोर पड़ते 'युवराज'

वैसे युवाओं के बीच भी बीते दो साल में राहुल की छवि धूमिल हुई है. अन्ना का आंदोलन हो या दिल्ली बलात्कार कांड, राहुल गांधी ऐसे संवेदनशील मसलों पर कभी नहीं बोले. दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान युवा राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाते दिखे. फेसबुक और ट्विटर पर तो राहुल के खिलाफ चुटकुलों की बाढ़ सी आ चुकी है.

पार्टी के भीतर 'राहुल, राहुल' के नारों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कार्यकर्ताओं को चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कह रही हैं. चुनाव से पहले कांग्रेस वामपंथी सरकार की तरह लोकलुभावन समाज कल्याण के कार्यक्रम भी लागू कर रही है.

चुनाव में कांग्रेस का मुख्य मुकाबला विपक्षी पार्टी बीजेपी से होगा. बीजेपी 2005 से विपक्ष में बैठी हुई है. बीजेपी भी अब तक प्रधानमंत्री पद का दावेदार तय नहीं कर सकी है. हालांकि बीच बीच में नरेंद्र मोदी का नाम उछलता है, लेकिन गुजरात दंगों की वजह से मोदी को गठबंधन की सभी पार्टियां स्वीकार करेंगी, इसकी संभावनाएं कम ही हैं.

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर को लगता है कि अगर विपक्षी बीजेपी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश करती है तो कांग्रेस को फायदा मिलेगा. अय्यर ने कहा, "बीजेपी की जहां तक बात है तो वह अंदरूनी लड़ाई से जूझ रही है. वे ऐसा चिंतन शिविर नहीं लगा सकते क्योंकि वे राष्ट्रीय स्वंयसेवक की कठपुतली भर हैं. अगर मोदी विपक्ष के नेता बने तो इससे हमारी राह और आसान हो जाएगी."

रिपोर्टः ओंकार सिंह जनौटी

संपादनः अनवर जे अशरफ

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