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दुनिया

राष्ट्रपति के इस्तीफे से जर्मनी हैरान

जर्मनी के राष्ट्रपति हॉर्स्ट कोएलर की अचानक इस्तीफ़े पर बर्लिन का राजनीतिक जगत चकित रह गया है. राजनीतिक रूप से राष्ट्रपति का पद निष्पक्ष पद होता है. फिर भी उनके विचारों की जर्मनी में आलोचना भी होती है.

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कोएलर के साथ चांसलर मैर्केल

उनके विचारों के समर्थकों और आलोचकों दोनों ने ही इस्तीफ़े पर अफ़सोस का इज़हार किया है.

हॉर्स्ट कोएलर का इस्तीफ़ा चांसलर अंगेला मैर्केल की सरकार के लिए मुश्किल घड़ी में आया है. अपनी प्रतिक्रिया में चांसलर अंगेला मैर्केल ने इस्तीफ़े पर अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि इस्तीफ़े के बारे में टेलीफोन मिलने के बाद उन्होंने कोएलर को मनाने का प्रयास किया लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली. चांसलर ने राष्ट्रपति को आर्थिक मामलों में अपना महत्वपूर्ण सलाहकार बताया जिनसे वे समय पर राय लेती थीं.

कोएलर की जीवन कथा के लेखक और बॉन विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर गैर्ड लांगगुथ ने कहा कि कोएलर का इस्तीफ़ा एक ओर इस बात की मांग है कि ऐसे पद के साथ बेहतर तरीक़े से पेश आना चाहिए तो दूसरी ओर इस बात का भी सबूत है कि कोएलर इस पद के अनुरूप नहीं ढले थे.

Flash-Galerie Horst Köhler tritt zurück Afghanistan

जर्मन विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले को राष्ट्रपति ने सबसे पहले अपने इरादे का बारे में सोमवार को दोपहर को बताया. वेस्टरवेले को राष्ट्रपति के इस फैसले से निराशा हुई. वेस्टरवेले ने ही छह साल पहले 2004 में राष्ट्रपति के लिए कोएलर के नाम का प्रस्ताव दिया था. जर्मनी में विपक्षी पार्टी एसपीडी के अध्यक्ष जिगमार गाब्रिएल ने सत्ताधारी मोर्चे पर दोष मढ़ते हुए कहा कि इस क़दम को समझा जा सकता है यदि यह देखें कि जिन लोगों ने राष्ट्रपति को चुना, उन्हीं ने समर्थन वापस ले लिया.

जर्मनी में वामपंथी पार्टी डी लिंके सेना की विदेशों में तैनाती की घोर आलोचक है और हर मौके पर जर्मन सेना को वापस बुलाने की मांग करती है. कोएलर के इस्तीफ़े पर अपनी प्रतिक्रिया में डी लिंके की पार्टी अध्यक्ष गेज़ीने लौएच ने कहा कि वे चांसलर मैर्केल से मांग करेंगी कि वह कोएलर के इस्तीफ़े से सबक लें और देश की विदेश नीति पर फिर से विचार करें.

पार्टी के संसदीय दल के नेता ग्रेगोर गीज़ी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि उन्हें राष्ट्रपति से अपेक्षा थी कि वे अपनी टिप्पणी का आलोचनात्मक विवेचन करेंगे. ग्रीन पार्टी ने राष्ट्रपति के इस्तीफ़े को सत्ताधारी मोर्चे के विघटन की शुरुआत बताया है तो दुनिया भर में ग़रीबों के विकास में लगे संगठनों ने राष्ट्रपति के इस्तीफ़े पर अफ़सोस जताया है.

रिपोर्टः एजेंसियां/महेश झा

संपादनः ए जमाल

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