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दुनिया

राडिया टेप कांड की जांच की जरूरत: सरकार

यूपीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि लॉबिस्ट नीरा राडिया के साथ बातचीत के टेप सार्वजनिक होने के मामले की जांच कराए जाने की जरूरत है. टेप सार्वजनिक होने के बाद अदालत की शरण में गए हैं उद्योगपति रतन टाटा.

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सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि लॉबिस्ट नीरा राडिया के साथ बातचीत के टेप ऐसा मामला है जिसकी जांच किए जाने की जरूरत है. वैसे सरकार का पक्ष है कि रतन टाटा और नीरा राडिया के बीच बातचीत को छापे जाने का मसला मीडिया और रतन टाटा के बीच की बात है.

नीरा राडिया के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत सार्वजनिक होने के बाद टाटा समूह के मालिक रतन टाटा ने टेप लीक किए जाने के मामले की जांच करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर को गृह सचिव, वित्त मंत्रालय, आयकर विभाग और सीबीआई को एक नोटिस जारी किया था.

कोर्ट ने आउटलुक और ओपन मैगजीन को भी एक नोटिस भेजा है जिन्होंने बातचीत के अंशों को छापा है. सभी पक्षों से अदालत ने 10 दिन के भीतर जवाब भेजने के लिए कहा और मामले की सुनवाई 13 दिसंबर को होनी है.

टाटा के मुताबिक नीरा राडिया का फोन इसलिए टैप किया गया क्योंकि उन्होंने कथित रूप से टैक्स की चोरी की और ऐसे में टेप का इस्तेमाल किसी और उद्देश्य से नहीं किया जा सकता. टाटा का कहना है कि राडिया के साथ उनकी बातचीत को सार्वजनिक किया जाना संवाद और अभिव्यक्ति की आजादी और निजता का उल्लंघन है.

29 नवंबर को कोर्ट में याचिका दायर करते हुए टाटा ने अंतरिम राहत के तौर पर वेबसाइटों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में टेप के अंशों को छापे या प्रकाशित किए जाने से रोका जाना चाहिए क्योंकि इन्हें गैरकानूनी तरीके से हासिल किया गया है. कैग संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2जी स्पैक्ट्रम घोटाला करीब 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये का है.

2जी मामले पर विवाद बढ़ने के दौरान लॉबिस्ट नीरा राडिया और पत्रकारों, नेताओं और उद्योगपतियों के साथ बातचीत के टेप सामने आ गए जिससे मामला पेचीदा हो गया. इसमें ए राजा को टेलीकॉम मंत्री बनाने की कोशिशें, सरकार और उद्योग जगत में साठगांठ के अलावा कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ए कुमार

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