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ताना बाना

राजीव के हत्यारे रिहा होंगे

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सात हत्यारों को तमिलनाडु सरकार ने रिहा करने का फैसला किया है. तीन दोषियों की मौत की सजा बदलने के बाद राज्य कैबिनेट ने संविधान का हवाला देते हुए सभी की रिहाई का एलान कर दिया.

मौत के फंदे के करीब झूल रहे मुरुगन, संथन और पेरारिवलन को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी. केंद्र सरकार उनकी दया याचिका पर 11 साल तक कोई फैसला नहीं कर सकी. इसी देरी को आधार बनाते हुए सर्वोच्च अदालत ने मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया.

अदालत के फैसले के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने कैबिनेट की बैठक बुलाई. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए कैबिनेट ने तय किया कि राज्य सरकार अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेगी. कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार संविधान की धारा 432 (सजा को वापस लेना) और 433ए (मृत्युदंड और उम्र कैद के दोषियों की रिहाई) जैसे अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती है. बुधवार को राज्य सरकार ने धारा 432 का इस्तेमाल करने का एलान किया. कैबिनेट के मुताबिक सातों दोषी जेल में 23 साल गुजार चुके हैं.

कांग्रेस के नेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में लिट्टे के आत्मघाती हमले में मारे गए. मामले की जांच भारत की संघीय जांच एजेंसी सीबीआई ने की. केंद्रीय स्तर पर जांच की वजह से तमिलनाडु सरकार को अब दोषियों की सजा माफ करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजनी होगी. सीआरपीसी की धारा 435 के तहत ऐसे मामलों में केंद्र की सलाह अनिवार्य है.

इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा, "राज्य सरकार अपने कैबिनेट के फैसले को केंद्र के पास भेजेगी. अगर केंद्र तीन दिन के भीतर जवाब देने में नाकाम होता है तो संविधान के तहत दी गई शक्तियों के आधार पर मेरी सरकार उन्हें तुरंत रिहा कर देगी."

जयललिता के मुताबिक तमिलनाडु विधानसभा पहले ही मुरुगन, संथन और पेरारिवलन की मौत को रद्द करवाने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पास करा चुकी थी, इसके बावजूद केंद्र ने बीते ढाई साल में इस पर कोई निर्णय नहीं किया.

लोकसभा चुनावों से पहले इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए जयललिता ने करुणानिधि की पार्टी डीएमके पर भी आरोप लगाया, "कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए का हिस्सा होने के बावजूद डीएमके ने केंद्र पर इस मुद्दे का फैसला करने का दबाव नहीं बनाया."

राजीव गांधी हत्याकांड की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने जनवरी 1998 में सभी 26 दोषियों को मौत की सजा सुनाई. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, जहां सिर्फ सात को दोषी करार दिया गया. जिन 19 लोगों को निचली अदालत ने हत्या और साजिश में शामिल होने का दोषी करार दिया था, उन्हें सर्वोच्च अदालत ने बरी कर दिया. सात दोषियों में चार को मृत्युदंड दिया गया और तीन को उम्र कैद. अप्रैल 2000 में भारत सरकार ने राजीव गांधी हत्याकांड की महिला दोषी नलिनी की मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया.

राजीव गांधी हत्याकांड के सभी दोषी श्रीलंका में अलग तमिल राष्ट्र की मांग करने वाले लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के सदस्य थे. श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ कार्रवाई के लिए राजीव गांधी के शांति सेना नाम से भारतीय सेना भेजी. इसी के विरोध में लिट्टे ने राजीव गांधी को निशाना बनाया.

ओएसजे/एजेए (एएफपी, पीटीआई)