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दुनिया

राजस्थान में प्रस्ताव: महाराणा प्रताप को विजेता बताया जाए

राजस्थान में यूनिवर्सिटी स्तर पर पढ़ाई जा रही किताबों में हल्दी घाटी के इतिहास को बदलकर दोबारा लिखा जा सकता है. नए प्रस्ताव मुताबिक हल्दी घाटी के युद्ध में राजपूत राजा महाराणा प्रताप विजयी हुए थे.

राजस्थान में संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर पैदा हुआ विवाद अभी थमा ही नहीं था कि अब इतिहास में दर्ज हल्दी घाटी के युद्ध पर भी एतराज जताया जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपी खबर मुताबिक राज्य में यूनिवर्सिटी स्तर पर पढ़ाई जा रही किताबों में हल्दी घाटी के इतिहास के मौजूदा तथ्यों को बदलकर दोबारा लिखा जा सकता है. राज्य की वसुंधरा राजे सरकार के तीन मंत्रियों ने ऐसे प्रस्ताव का समर्थन भी किया है. इस नए प्रस्ताव के मुताबिक, हल्दी घाटी के युद्ध में राजपूत राजा महाराणा प्रताप ने कुंवर मान सिंह के नेतृत्व में लड़ रही मुगल सम्राट अकबर की सेना को हरा दिया था.

राजस्थान यूनिवर्सिटी की हाल में हुई एक बैठक में पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ और स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी समर्थित इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई. बुधवार को शहरी विकास और आवास मंत्री राजपाल सिंह शेखावत भी इसके समर्थन में आ गए.

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पिछले हफ्ते यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट सदस्य और भाजपा विधायक मोहन लाल गुप्ता ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास पाठ्यक्रम को फिर से लिखने का प्रस्ताव दिया था ताकि वर्ष 1576 में हुए इस युद्ध का विजेता महाराणा प्रताप को बताया जाए. कार्यवाहक कुलपति राजेश्वर सिंह ने बताया कि प्रस्ताव पर उचित निर्णय लेने के लिए इसे यूनिवर्सिटी बोर्ड ऑफ स्ट्डीज को भेजा दिया गया है.

इतिहासकार सतीश चंद्रा की किताब मुताबिक "यह युद्ध महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच हुआ था, अकबर की सेना का नेतृत्व कुंवर मान सिंह कर रहे थे. लेकिन राजपूत राजा का साथ दे रहे हकीम सूर के नेतृत्व वाले अफगान दल ने भी इस युद्ध में विशिष्ट भूमिका निभाई. लेकिन यह युद्ध महाराणा और अकबर के बीच गतिरोध तोड़ने में विफल रहा जिसके बाद महराणा प्रताप पहाड़ों में चले गए थे.”

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प्रस्ताव का समर्थन कर रहे मंत्री कालीचरण सर्राफ, अकबर को महज एक विदेशी आक्रमणकारी कहते हैं. इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने सर्राफ के हवाले से लिखा है, "राणा प्रताप ने ही युद्ध जीता था और हम इतने समय से बच्चों को गलत पढ़ाते आ रहे हैं. लेकिन तथ्य यही है कि अकबर एक विदेशी आक्रमणकारी था और महाराणा प्रताप एक बहादुर और देशभक्त शासक थे."

उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रस्ताव इसमें सुधार करने की बात करता है तो क्या गलत है.

हालांकि इस तरह का यह पहला मामला नहीं है. इसके पहले भी ऐतिहासिक मुद्दों पर सवाल उठते रहे हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पुराणों के आधार पर इतिहास को दोबारा लिखे जाने का मुद्दा भी सुर्खियां बटोर चुका है. इसके अतिरिक्त कर्नाटक सरकार के टीपू सुल्तान की याद में किए जाने वाले कार्यक्रम का विरोध भी तमाम हिंदूवादी संगठनों द्वारा किया गया था. इन संगठनों का कहना था कि टीपू ने हिंदुओं को मौत के घाट उतारा है और उसकी महानता का बखान करना इतिहास को गलत तरीके से पेश करना होगा.

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