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जर्मन चुनाव

राजपक्षे के दौरे का विरोध, वाइको हिरासत में

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की भारत यात्रा का विरोध कर रहे वाइको को समर्थकों के साथ हिरासत में ले लिया गया. तमिल विद्रोह को कुचलने के बाद राजपक्षे पहली बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं.

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हिरासत में वाइको

भारत दौरे से पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपाक्षे ने विपक्षी तमिल नेताओं से मुलाकात की है. एलटीटीई के सफाए के बाद पहली बार तमिल नेशनल एलायंस के नेताओं से मुलाकात में राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि तमिलों की समस्या का राजनीतिक हल भी ढूंढा जाएगा.

राष्ट्रपति ने कहा "मुझ पर भरोसा कीजिए हम साथ मिलकर हमारे लोगों की समस्या सुलझा सकते हैं. मैं स्थायी समाधान चाहता हूं लेकिन आतंकवाद के आगे झुकना मुझे कबूल नहीं, आतंकवादी जो चाहते हैं वो मैं कभी नहीं होने दूंगा."

Flash-Galerie Sri Lanka

मंगलवार से राष्ट्रपति तीन दिन के भारत दौरे पर हैं. सोमवार रात को आर संपंथन के नेतृत्व में 14 सांसदों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की. तमिल सांसदों ने राष्ट्रपति के सामने उत्तरी राज्य में तमिलों की मुश्किलों पर बात की. मुलाकात के दौरान आर संपंथन ने कहा कि वह उस समाधान की बात नहीं कर रहे हैं जो प्रभाकरन ने सुझाया था. उन्होंने साफ किया कि पिछले चुनाव में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया कि कोई भी अलगाववादी टीएनए का उम्मीदवार न बने. राष्ट्रपति के सामने तमिल लोगों की मुश्किलों के बारे में रखी गई रिपोर्ट में भोजन, घर,शिक्षा, रोजगार, जमीन और विस्थापित लोगों की खेती से जुड़ी समस्याओं का जिक्र है.

इधर भारत में श्रीलंकाई राष्ट्रपति के दौरे का विरोध कर रहे एमडीएमके नेता वाइको और सीपीआई नेता वीसी काची समेत हजारों लोगों को हिरासत में ले लिया गया. ये लोग अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे. एमडीएमके और सीपीआई समेत दूसरी तमिल समर्थक पार्टियों से मिलकर बने श्रीलंका तमिल मूवमेंट के कार्यकर्ताओं को तब हिरासत में लिया गया जब ये लोग काले झंडे लेकर श्रीलंका के उप उच्चायुक्त के दफ्तर पर प्रदर्शन करने जा रहे थे.

पिछले साल मई में श्रीलंकाई सेना ने एलटीटीई को शिकस्त दी और इस दौरान एलटीटीई प्रमुख वी प्रभारकरन मारा गया. सेना ने एलटीटीई को भले ही खत्म कर दिया लेकिन पूरे इलाके में भारी तबाही हुई और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इस दौरान बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मारे गए. हजारों लोग विस्थापित हुए और अभी भी इनका पुनर्वास सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

रिपोर्टः पीटीआई/एन रंजन

संपादनः ए जमाल

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