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ताना बाना

रवींद्रनाथ के सम्मान में गैलरी बनवाएगा चीन

भारत और चीन के कूटनीतिक रिश्तों में भले ही तल्खियां बनी रहती हों, लेकिन सांस्कृतिक पहलकदमियों के जरिए इनमें मिठास भरने की कोशिश जारी है. चीन ऐसी ही एक कोशिश के तहत रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी ने एक गैलरी के लिए पैसा देगा.

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चीन के काउंसिल जनरल माओ सेवेई ने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्र नाथ टैगोर के चीन के साथ रहे रिश्तों पर रोशनी डालने के मकसद से चीन इस गैलरी के लिए धन देगा. इस गैलरी का नाम रवींद्रनाथ और चीन रखा जाएगा. इस पर कुल 53.6 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसका भुगतान चीन की सरकार करेगी. इस सिलसिले में माओ ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर करुणा सिंधु दास के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए.

यह गैलरी 180 वर्ग मीटर में बनाई जाएगी. इसमें चीनी सभ्यता, भगवान बुद्ध भारत और चीन के बीच महान संपर्क, चीन के लिए रवींद्रनाथ की जिज्ञासा और सम्मान, 1924 में उनकी चीन यात्रा, विश्व भारती शांतिनिकेतन और चीनी साहित्य संस्कृति के अध्ययन जैसे विषयों पर अलग अलग शाखाएं होंगी.

माओ ने बताया कि इस गैलरी का उद्घाटन अगले साल मई में टैगोर की 150वीं जयंती के मौके पर किया जाएगा. माओ ने कहा कि चीन में टैगोर काफी लोकप्रिय हैं और उनके पूरे काम को 24 अंकों में चीनी भाषा में अनुवाद करके पिछले साल ही छापा गया है. माओ ने कहा, "जहां तक मैं जानता हूं, अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के बाद चीनी भाषा ने ही टैगोर के लिए सबसे ज्यादा काम किया है."

टैगोर से जुड़े इसी तरह के कुछ कदम चीन में भी उठाए गए हैं. इसी साल मई में जब भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल चीन गई थीं, तो उन्होंने वहां शंघाई की एक व्यस्त सड़क पर टैगोर की एक प्रतिमा का अनावरण किया था. इस प्रतिमा को टैगोर की शंघाई की 86 साल पहले की गई यात्रा की याद में बनाया गया है.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः आभा एम

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