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डीडब्ल्यू अड्डा

रविशंकर को 90 का होने पर बधाई

इस सप्ताह जर्मन समाचार साधनों में मंगलवार को भारत में पुलिस पर हुए माओवादी हमले को प्रमुखता दी गई, जिसमें 76 जवान मारे गए थे. सितार सम्राट रविशंकर के 90वें जन्मदिन सहित दक्षिण एशिया के अन्य विषयों की भी चर्चा की गई.

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रवि शंकर

मिसाल के तौर पर साप्ताहिक पत्रिका डेअ श्पीगेल में एक लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान-अफ़ग़ान सीमा क्षेत्र में उग्रवादी जिहादियों के प्रशिक्षण शिविरों में जर्मनी से आनेवालों का तांता लग गया है. लेख में कहा गया है कि बीहड़ पहाड़ी इलाकों में उन जर्मनों की एक कॉलोनी बन गई है, जो अपना सब कुछ पीछे छोड़ आए हैं और उन्हें हिंदूकूश पहाड़ियों में एक नया बसेरा मिला है. जर्मनी के संघीय अपराध निरोधक दफ़्तर में ऐसे लोगों की एक सूची तैयार की गई है, जो पिछले सालों के दौरान वहां गए हैं. इसमें लगभग एक सौ नाम हैं. शुरू की पहली दो पीढ़ियों में ऐसे जुझारू नौजवान थे, जो अपनी पत्नियों को छोड़कर युद्ध में कूद जाना चाहते थे. तीसरी पीढ़ी उनसे अलग है. ये अलग-अलग नस्ल के हैं, इनकी उम्र कहीं कम है, अक्सर इनमें युवक-युवतियों को देखा जा सकता हैं, जो अपने बच्चे के जन्म के ठीक बाद या उससे पहले जर्मनी से रवाना हो जाते हैं. बर्लिन से वज़ीरिस्तान.


साप्ताहिक पत्रिका फ़्राइटाग में मुंबई हमले के संदिग्ध अभियुक्त डेविड हेडली के साथ अमेरिकी सरकारी अभियोक्ता की डील की चर्चा की गई है. पत्रिका का कहना है,

हेडली के साथ हुए समझौते के जिन हिस्सों को जारी किया गया है, उनसे साफ़ हो जाता है कि यह मामला क्यों इतना विस्फोटक है - वह सीआईए का एजेंट था. हालांकि सरकारी तौर पर इससे इंकार किया जा रहा है, उसके जीवन वृत्तांत से यह स्पष्ट हो जाता है. यह एक पेचीदा सवाल है कि वह कैसे एक ही समय में जासूस और आतंकवादी रहा. पांच बार उसने भारत की यात्रा की. सीआईए को 26 नवंबर के मुंबई हमले के बाद की गई यात्रा के साथ-साथ इन सभी यात्राओं के बारे में पता था, लेकिन भारतीय अधिकारियों को सूचित करने के बारे में नहीं सोचा गया. इसके बदले भारतीय अधिकारियों के हाथों आने से पहले उसे तुरंत सुरक्षित रूप से अपनी हिरासत में ले लिया गया. अब हेडली के साथ हुई डील शतरंज की एक चाल है, जिसके ज़रिये न सिर्फ़ सीआईए के साथ उसके रिश्तों पर पर्दा डाला जा रहा है, बल्कि पाकिस्तान में उसके संपर्कों को भी छिपाया जा रहा है.

बर्लिन के समाचार पत्र नोएस डॉएचलांड में भारत में शिक्षा के मौलिक अधिकार की चर्चा की गई है. समाचार पत्र में कहा गया है,

बेशक उन कारणों का विश्लेषण करना पड़ेगा कि क्यों अब तक लगभग एक करोड़ बच्चों को स्कूल जाने का मौक़ा नहीं मिला, या कुछ ही महीनों के बाद उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया. एक प्रेस लेख में मंत्री कपिल सिब्बल ने इस सिलसिले में बच्चों के कुछ हिस्सों का ज़िक्र किया है - ज़बरी मजूरी करने वाले बच्चे, मवेशी चराने वाले बच्चे, कारखानों और घरों में काम करने वाले बच्चे, अपने छोटे भाई बहनों की देखभाल कर रहे बच्चे, सड़कों पर पल रहे बच्चे, या ऐसी किशोरियां, बचपन में ही जिनकी शादी कर दी गई. मंत्री महोदय ने उन बच्चों का ज़िक्र नहीं किया, जिन्हे चकलाघरों में जाने के लिए मजबूर किया गया.

और अब श्रीलंका. संसदीय चुनाव के संदर्भ में दैनिक फ़्रांकफ़ुर्टर आलगेमाइने त्साइटुंग में पूछा गया है कि क्या वहां परिवार तंत्र का विकास हो रहा है. आगे कहा गया है,

राष्ट्रपति राजपक्षे के भाई ऊंचे राजनीतिक पदों पर हैं, समाज के सभी क्षेत्रों में दूसरे रिश्तेदारों और दोस्तों का बोलबाला है. इस बीच तानाशाही शब्द का प्रयोग किया जाने लगा है, जिसके ज़रिये लोकतंत्र को ख़त्म कर दिया गया है. सरकार के अनेक विरोधियों को ख़ामोश कर दिया गया है, या वे राजपक्षे के खेमे में आ गए हैं. लगभग दो तिहाई सांसद किसी न किसी सरकारी पद पर हैं. मंत्रिमंडल में सौ से ज़्यादा मंत्री हैं.

महान भारतीय सितारवादक पंडित रविशंकर के 90वें जन्मदिन के अवसर पर जर्मनी के रेडियो और टेलिविज़न सहित अखबारों में संगीत को उनके योगदान की चर्चा हुई. एक टिप्पणी में फ़्रांकफ़ुर्टर आलगेमाइने त्साइटुंग में कहा गया है,

मोटे तौर पर शायद कहा जा सकता है कि 1967 से 1971 के बीच पश्चिमी देशों के प्रबुद्ध लोगों के ड्राइंग रुमों और बेडरुमों में रविशंकर के संगीत को मुक्त चिंतन और चेतना के विकास का प्रतीक समझा जाता रहा, और इसलिए कहना मुश्किल है कि कितने बच्चों का गर्भाधान इस संगीत के वातावरण में हुआ. खुद रविशंकर ने बाद में एक बार कहा था कि जिस हल्केपन के साथ भारत को देखा जाता है और उसकी संस्कृति का दुरुपयोग होता है, उससे उन्हें गहरे अपमान का बोध होता है.

हर कहीं शोएब मलिक और सानिया मिर्ज़ा की चर्चा है. जर्मन समाचार पत्रों में भी. मसलन बर्लिन के दैनिक डी वेल्ट में कहा गया है -

28 साल के शोएब मलिक के घर के सामने सैकड़ों फ़ैन्स आतिशबाज़ियां छोड़ रहे हैं और सड़कों पर नाच रहे हैं, जबकि भारतीय इंटरनेट पर नफ़रत का एक सैलाब देखा जा सकता है. वहां कहा जा रहा है - मिर्ज़ा हमारे देश के लिए कलंक है. ऐसी भी अपीलें की जा रही हैं कि मिर्ज़ा जिन चीज़ों के लिए ऐड देती हैं, उनका बॉयकॉट किया जाए. गुस्से से भरे हुए ऐसे लोग कह रहे हैं कि अभी दो ही महीना पहले सानिया अपने भारतीय दोस्त से अलग हुई, और अब वह एक पाकिस्तानी से शादी कर रही है.

संकलन: थॉमस बैर्टलाइन

संपादन: उज्ज्वल भट्टाचार्य

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