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दुनिया

रजोनिवृत्ति और बलात्कार में संबंध पर सवाल

क्या रजोनिवृत्ति की आयु पार कर चुकी महिला का बलात्कार दंडनीय अपराध नहीं होना चाहिए? दिल्ली हाई कोर्ट के हाल में आए एक फैसले पर सोशल मीडिया पर बहस गर्म है. लेकिन सवाल यह भी है कि क्या फैसले को गलत ढंग से पढ़ा गया?

हाल में दिल्ली हाई कोर्ट ने 2010 में दिल्ली की एक महिला के कथित बलात्कार और हत्या के मामले पर फैसला सुनाया. फैसले में अदालत ने 49 वर्षीय अच्छे लाल को हत्या का दोषी माना लेकिन बलात्कार का नहीं. फैसले में कहा गया कि महिला के शरीर पर चोटों या जबरदस्ती करने जैसे कोई निशान नहीं मिले. सिर्फ योनि पर मिले निशान ताकत के इस्तेमाल की तरफ इशारा करते हैं लेकिन बलात्कार साबित नहीं करते. इसलिए सेक्स में दोनों की मर्जी शामिल मानी जाएगी. लेकिन इसी फैसले में एक जगह अदालत ने कहा कि "मृतक 65 से 70 साल की आयु के बीच थीं, यानि रजोनिवृत्ति की आयु पार कर चुकी थीं." इस पर सोशल मीडिया पर बहस का बाजार गर्म है.

हाई कोर्ट के फैसले को कुछ मीडिया संस्थानों ने यह कह कर छापा कि महिला के रजोनिवृत्त होने के कारण बलात्कार का मामला नहीं बना. सोशल मीडिया पर फैसले को लेकर जमकर बहस छिड़ी है. लेकिन फैसले में कहीं भी नहीं कहा गया है कि क्योंकि महिला रजोनिवृत्ति की आयु में थी इसलिए बलात्कार का मामला नहीं बनता. मानव अधिकार कार्यकर्ता और महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली वकील वृंदा ग्रोवर ने दैनिक डीएनए से कहा कि "रजोनिवृत्ति एक चिकित्सकीय अवस्था है, इस शब्द का इस्तेमाल गैरजरूरी और भटकाने वाला है."

फैसले में कहा गया है कि 'संभोग में ताकत का इस्तेमाल किया गया लेकिन मृतक के साथ जबरदस्ती करने के प्रमाण नहीं मिलते.' रजोनिवृत्ति शब्द का इस्तेमाल इस बात के समर्थन में भी किया गया हो सकता है. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से साबित होता है कि घटना से पहले अभियुक्त और मृतक दोनों ने शराब पी थी. अदालत के मुताबिक मृतक के शरीर पर चोटों के निशान न होने के कारण माना जा सकता है कि घटना में सेक्स के लिए दोनों की मर्जी शामिल थी. साल 2010 में मृतक को अपने घर में बगैर कपड़ों के मृत हालत में पाया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के वकील कॉलिन गोंसालविस ने डीएनए को बताया कि अदालत का फैसला अपनी जगह सही हो सकता है लेकिन फैसले में इस शब्द का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है. मृतक की योनि पर चोट के निशान हैं जो कि बलात्कार की तरफ इशारा करते हैं. लेकिन शरीर पर किसी और निशान के बगैर इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता.


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