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ताना बाना

यौन शोषण मामले में पोप के ख़त पर विवाद

पोप बेनेडिक्ट 16वें पर आरोप लगा है कि बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोपी पादरी के ख़िलाफ़ कार्रवाई में उन्होंने देरी की. यह विवाद 1985 के एक ख़त से उपजा है जिस पर उनके हस्ताक्षर हैं. उस समय वह पोप नहीं थे.

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1985 के ख़त से उपजा विवाद

बच्चों के साथ यौन शोषण के विवाद में कैथलिक चर्च पिछले कई हफ़्तों से विवादों में है और यह पहली बार है जब पोप बेनेडिक्ट पर सीधे आरोप लगाया गया है. 1985 में कार्डिनल रात्ज़िंगर वेटिकन के दिशा निर्देश तय करने वाली संस्था के प्रमुख थे. उस दौरान अमेरिकी पादरी स्टीफ़न किज़ल पर बच्चों के साथ यौन शोषण का आरोप लगा.

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न्यूज़ एजेंसी एपी के मुताबिक़ उसके पास वह ख़त है जिसमें स्टीफ़न किज़ल के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. इस ख़त पर कथित रूप से कार्डिनल रात्ज़िंगर के हस्ताक्षर भी हैं. कार्डिनल रात्ज़िंगर ने सलाह दी थी कि पादरी से उसकी ज़िम्मेदारियां छीने जाने से पहले चर्च के हितों को भी ध्यान में रखना होगा.

वेटिकन पर आरोप लग रहे हैं कि पादरी बनने से पहले पोप बेनेडिक्ट जब चर्च में काम कर रहे थे तो उन्होंने यौन शोषण के मामलों पर सही कार्रवाई नहीं की. हालांकि वेटिकन का कहना है कि इस ख़त को सही संदर्भ में पेश नहीं किया गया है और यह इस मामले में विचारों के लंबे आदान प्रदान का एक छोटा सा अंश है.

एपी के मुताबिक़ सैन फ़्रांसिस्को में दो बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार के बाद स्टीफ़न किज़ल पर तीन साल तक निग़रानी रखी गई. 1981 में किज़ल को हटाने की अनुशंसा भी हुई लेकिन 1987 तक उस पर कार्रवाई नहीं हुई. 1985 में लैटिन भाषा में लिखे गए उस ख़त में कार्डिनल रात्ज़िंगर ने सलाह दी कि किज़ल को हटाने के फ़ैसले से पहले उस पर अच्छी तरह विचार होना चाहिए.

1995 में एक लड़की से यौन दुर्व्यवहार के आरोप में साल 2004 में किज़ल को छह साल जेल की सज़ा सुनाई गई. इससे पहले बाल यौन शोषण से जुड़े विवाद पोप पर ऐसे अमेरिकी पादरी के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगा था जिसने 1970 के दशक में लगभग 200 मूकबधिर बच्चों का यौन शोषण किया.

रिपोर्ट: एजेंसिंया/एस गौड़

संपादन: ए कुमार

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