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ब्लॉग

यूरो बैंक का विवादास्पद फैसला

दावोस में भी यूरोपीय केंद्रीय बैंक के सरकारी बॉन्ड खरीदने के फैसले पर चर्चा हो रही है. बारबरा वेजेल का कहना है कि कुछ संकटग्रस्त देशों के लिए सुधार मुश्किल हैं, लेकिन बैंक से नया कर्ज पाना उनमें हेकड़ी ला सकता है.

शुरू में ही साफ कर दें. यूरोपीय बैंक के प्रमुख मारियो द्रागी ने इस खास असर की निश्चित तौर पर कल्पना नहीं की थी. हालांकि हफ्तों से साफ था कि उनकी घोषणा का समय बहुत नाजुक था. ग्रीस में चुनाव से तीन दिन पहले उनकी मुद्रानीति संबंधी घोषणाओं का असर जरूर होगा. और इसका किसको फायदा होगा यह भी हफ्तों से साफ है, ग्रीस की वामपंथी सीरिजा पार्टी के प्रमुख अलेक्सिस सिप्रास के धरे से खुशी की आवाजें सुनाई दे रही हैं कि अब केंद्रीय बैंक ग्रीस की मदद के लिए सामने आएगा. अब ग्रीस को उसके कर्ज से छुटकारा दिलाने, घातक बचत नीति को समाप्त करने और ग्रीक अर्थव्यवस्था को विकास के रास्ते पर लाने का मौका है. और सिप्रास बोल भी रहे हैं कि बॉन्ड की खरीद के जरिए ग्रीस के कर्ज को तकनीकी तरीकों से इस तरह गायब किया जाएगा कि यूरोपीय करदाताओं पर उसका बोझ नहीं पड़ेगा.

नया कर्ज और अक्खड़पन

यह जादू कैसे होगा यह साफ नहीं है. लेकिन इस घोषणा ने कि केंद्रीय बैंक नोट छापेगा, ग्रीस में उत्साह की लहर पैदा कर दी. लोगों को लगता है कि अब बचत नीति का अंत होगा जिसने मुल्क को जकड़ रखा है. इसके बदले अब पुरानी सरकार के कदमों को पलटने के लिए 11 अरब यूरो का निवेश किया जाएगा. मसलन नौकरी से निकाले गए सरकारी कर्मचारियों को फिर से बहाल करने के लिए या फिर संपत्तिकर समाप्त करने के लिए. सीरिजा पार्टी को लगता है कि सरकारी खर्च फ्रैंकफुर्ट से आएगा जहां केंद्रीय बैंक का मुख्यालय है. और पार्टी ने मतदाताओं से यही कहा है. बचत खत्म, नया धन आ रहा है. मारिया द्रागी कितना भी समझा लें, यदि सर्वेक्षणों की मानें तो ग्रीस के मतदाताओं को हल समझ में आ रहा है.

जर्मनी की सरकार और यूरोपीय आयोग ने समय रहते इसके खिलाफ आवाज उठाई थी. उन्होंने कहा था कि यूरोजोन ग्रीस के बिना भी जी सकता है और तय समझौतों का पालन करना होगा. लेकिन हजार अरब यूरो की खुशबू के सामने धमकियां असर नहीं कर रही हैं. यहां तक कि ग्रीस के वित्तमंत्री को भी कहना पड़ रहा है कि ग्रीस को उसकी कमजोरियों के लिए सजा देना और बॉन्ड की खरीद से बाहर रखना उचित नहीं है. और इसका असर निश्चित तौर पर ग्रीस से परे भी होगा. स्पेन में भी कहा जा रहा है कि बचत नीति को रोका जाए, नए निवेश किए जाएं. हालांकि ग्रीस और स्पेन के किसी युवा तुर्क ने अब तक ऐसा प्रोग्राम पेश नहीं किया है जिसकी मदद से टिकाऊ विकास संभव हो.

वामपंथियों के पास प्रोग्राम नहीं

घोषित लक्ष्य है कि यूरोप को दक्षिण से प्रभावित किया जाए और एक के बाद एक वामपंथी सरकार बनाई जाए जो बचत के लिए जर्मन दबाव को खत्म कर दे. यह लोकतांत्रिक चुनावों का नतीजा हो सकता है लेकिन अबतक किसी ने ऐसा प्रोग्राम पेश नहीं किया है कि खस्ताहाल अर्थव्यवस्थाओं को कैसे सुधारा जाएगा. यूरोजोन के लिए मामला और भी खतरनाक दिखता है जब इटली के मातेओ रेंसी की प्रतिक्रिया देखी जाए. उनका कहना है कि केंद्रीय बैंक का कार्यक्रम यूरोजोन में नीति बदलने और विकासोन्मुखी रास्ता पकड़ने का स्पष्ट संकेत है.

इटली के प्रधानमंत्री ने बहुत से सुधारों का आश्वासन दिया है लेकिन अब तक किसी को पूरा नहीं किया है. इटली की संरचनाएं बहुत ही जटिल हैं. जब संसाधनों की कमी का दबाव खत्म हो जाएगा तो सुधार करने का दबाव भी खत्म हो जाएगा. फ्रांस की हालत इतनी नाटकीय तो नहीं है, इतनी ही मुश्किल है. राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद भी क्षम बाजार और सामाजिक कल्याण कानून में परिवर्तन करने में कमजोर साबित हुए हैं. इसलिए अब यूरोजोन के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि दक्षिणी यूरोप और प्रांस की सरकारें यह समझें कि बुरा समय बीत चुका है. उन्हें धन मिलेगा, कुछ सुधार होंगे और सबकुछ पहले की तरह रहेगा. मारियो द्रागी जो भी कहें, पर अधिक संभावना है कि ऐसा ही होगा.

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