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दुनिया

यूरोप ही नहीं, एशिया पर भी पड़ी मार

आइसलैंड के ज्वालामुखी की राख के बादलों की वजह से यूरोप में ही नहीं, एशिया में भी हवाई यातायात को भारी नुकसान पहुंचा है. साथ ही यूरोप के बाजारों तक कई देशों का माल पहुंच ही नहीं पाया. कुछ का पहुंचा भी तो बड़ा महंगा पड़ा.

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हालांकि मंगलवार को यूरोप के 75 प्रतिशत वायुक्षेत्र को खोल दिया गया और लगभग 60 फीसदी उड़ानें बहाल हो गई हैं. आम दिनों में यूरोप में हर रोज 28 हजार उड़ानें भरी जाती है. कुछ दिन और लगेंगे जब सभी उडानें वक्त पर चल पाएंगी. राख से बादलों की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान बेशक यूरोपीय एयरलाइंसों को ही झेलना पड़ा है लेकिन एशिया की विमान कंपनियों को भी खासा नुकसान उठाना पड़ा है. यदि एशिया प्रशांत क्षेत्र को देखें तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि वहां एयरलाइंसों को पिछले दिनों हर रोज करीब 4 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है.

अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रांसपोर्ट असोशिएशन के मुताबिक दुनिया भर में विमान कंपनियों को इस संकट के दौरान हर दिन 27 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है. एशियाई एयरलाइंसों का 15 प्रतिशत कारोबार यूरोप से जुड़ा है. एशिया प्रशांत क्षेत्र की एयरलाइंसों के संघ के अध्यक्ष ऐंड्रयू हर्डमैन ने कहा कि यूरोपीय हवाई क्षेत्र के बंद रहने कारण एशिया में विश्व आर्थिक संकट से उबरने की रफ्तार और कम हो जाएगी.

वैसे दुनिया भर में इस संकट की वजह से यात्रियों और कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. लेकिन एशिया में चीन या हांगकांग जैसे क्षेत्र बहुत हद तक निर्यात पर निर्भर हैं. खासकर जापान, कोरिया और हांगकांग में बनने वाले मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या लग्जरी उत्पाद भी पिछले दिनों यूरोप नहीं पहुंच पाए हैं. दोनों तरफ की आपूर्ति व्यवस्था भंग हो गई है. उत्पादों को पानी के जहाज़ों के साथ यूरोप भेजना भी संभव नहीं है, क्योंकि इसमें बहुत वक्त लगेगा.

जापान की सबसे लोकप्रिय कार निर्माता कंपनी निसान को अपने कुछ कारखानों में उत्पादन तक बंद करना पड़ा क्योंकि कारों में इस्तेमाल होने वाले पुर्जे यूरोप से वक्त पर नहीं पहुंच पाए. जापान की कंप्यूटर कंपनी फुजित्सू के नोटबुक यूरोप में बहुत लोकप्रिय है लेकिन राख के बादलों की वजह से वह भी माल की आपूर्ति नहीं कर पाई. हालांकि कंपनी का मानना है कि अभी यूरोप के बाज़ारों में कुछ दिन के लिए उसका माल उपलब्ध है.

उधर दक्षिण कोरिया के जानकारों का अनुमान है कि संकट की वजह से वहां की कंपनियों को 11 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है. राजधानी सियोल के हवाई अड्डे पर ही इस वक्त करीब 3,000 टन माल जमा हो गया है. परेशान होकर कई कंपनियों ने स्पेन या पुर्तगाल जाने वाले पोतों को चार्टर किया और फिर उन्होंने फिर सडक के ज़रिए दूसरे यूरोपीय देशों तक अपना माल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन यह उन्हें बहुत महंगा पड़ा.

रिपोर्टः एजेंसियां/प्रिया एसेलबोर्न

संपादनः ए कुमार

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