यूरोप से आस्ट्रेलिया 90 मिनट में | विज्ञान | DW | 20.08.2015
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विज्ञान

यूरोप से आस्ट्रेलिया 90 मिनट में

महज डेढ़ घंटे में यूरोप से आस्ट्रेलिया का सफर मुमकिन है. इस बात पर भरोसा करना मुश्किल है लेकिन ध्वनि की गति से भी 20 गुना तेजी से चलने वाले हाइपरसॉनिक स्पेसलाइनर की मदद से यह हो सकता है.

जर्मन एयरोस्पेस सेंटर डीएलआर ने इस सबऑर्बिटल यात्री परिवहन के विकास में तेजी लाने की बात कही है. हालांकि इसकी शुरुआती कंसेप्ट स्टडी 2005 की है और डीएलआर ने सबसे पहले 2007 में इस परियोजना का प्रस्ताव पेश किया लेकिन बाद में इस पर काम बंद कर दिया गया. अब संस्था का कहना है कि हाइपरसोनिक स्पेसलाइनर की परिकल्पना पर अगर 33 अरब डॉलर और खर्च किए जाएं तो 2030 तक सुपरसोनिक यात्री विमान बनाना संभव होगा. यह विमान लगभग 100 यात्रियों को लेकर 90 मिनट में यूरोप से आस्ट्रेलिया पहुंच सकता है. 'द जर्मन स्पेसलाइनर' के बन जाने से यूरोप से अमेरिका का सफर केवल 60 मिनट में कर पाना संभव हो सकेगा.

यह कुछ कुछ अंतरिक्ष यान जैसा होगा. विमान का एक भाग ऑर्बिटर का बना होगा. इसमें यात्री बैठेंगे. दूसरा भाग एक बूस्टर स्टेज होगा जिसमें इको फ्रेंडली ईंधन डला होगा. ईंधन के तौर पर तरल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जाएगा. विमान की शुरुआत अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण की तरह होगी. 10 मिनट से भी कम समय में विमान का इंजन इसे ध्वनि की गति के 20 गुना तेजी दे देगा. इसके बाद 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्पेसक्राफ्ट अलग हो जाएगा और हाइपरसोनिक तरीके से मंजिल की ओर बढ़ेगा.

स्पेसलाइनर परियोजना के प्रमुख मार्टिन सिपेल ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस परियोजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने कहा, "हम इस संबंध में एक विकास खाके के साथ आगे आना चाहते हैं. इस परियोजना के साकार होने से केवल एक घंटे में 100 यात्रियों को लेकर एक महाद्वीप से दूसरे पर ले जाया जा सकेगा." हालांकि अत्यंत महंगे इस प्रॉजेक्ट के पूरा होने पर यात्रियों को बेहद महंगा टिकट खरीदना होगा. सिपेल ने कहा, "हर साल लाखों लोग एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप की यात्रा करते हैं और हमारा मानना है कि इसमें अंतरिक्ष का इस्तेमाल काफी कम किया जाता है." उन्होंने उम्मीद जताई कि स्पेसलाइनर एक दिन में ऐसी 15 उड़ानों को अंजाम देगा.

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