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दुनिया

यूरोप में व्यापक आर्थिक सुधारों पर सहमति

यूरोप ने सीमापारीय वित्तीय निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है और वैश्विक मंदी का कारण बनने वाले वित्तीय सेक्टर के सुधार की दिशा में अहम फैसले लिए हैं.

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यूरोपीय संघ के सदस्य देश, यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संसद के बीच बैंकों, बीमा कंपनियों और बाजार पर निगरानी के लिए तीन अलग अलग एजेंसियां बनाने पर सैद्धांतिक सहमति हो गई है.

यूरोप के घरेलू बाजार के लिए प्रभारी कमिश्नर मिशेल बार्निये ने कहा है कि महीनों की बातचीत के बाद इलाके की अर्थव्यवस्था को खतरा पहुंचाने वाले तत्वों पर नजर रखने के लिए एक यूरोपीय सिस्टेमेटिक रिस्क बोर्ड बनाने पर भी सहमति हुई है.

इन सुधारों का लक्ष्य 2008 जैसे वित्तीय संकट को रोकना है, जिसके बाद यूरोप में आर्थिक मंदी शुरू हो गई थी और दिवालिया होते बैंकों को बचाने के लिए करदाताओं को अरबों यूरो की मदद देनी पड़ी थी.

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"हम एक निर्णायक मुकाम पर पहुंचे हैं," कमिश्नर बार्निये ने कहा. "हम यूरोपीय वित्तीय निगरानी ढांचा बनाने के लिए एक राजनीतिक सहमति पर पहुंचे हैं." लेकिन इस डील को लागू किए जाने से पहले मंगलवार को संघ के वित्त मंत्रियों की बैठक में उसका अनुमोदन करना होगा और उसके बाद इस महीने संसद भी उस पर अपनी मुहर लगाएगी.

बातचीत में भाग लेने वाले इटैलियन सांसद जियानी पिटेला ने कहा, "यह लंबी सौदेबाजी थी." उसके बाद जनवरी तक इन तीनों एजेंसियों को गठन हो सकेगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जुलाई में ही 1930 के दशक के बाद से वॉल स्ट्रीट के सबसे व्यापक सुधारों के कानून पर दस्तखत कर दिए थे, लेकिन यूरोपीय संघ काफी पीछे चल रहा था. यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और यूरोपीय संसद के बीच जुलाई में इस बात पर गतिरोध हो गया था कि नई एजेंसियों को कितने अधिकार दिए जाएं. इससे पहले 2009 में ही ब्रिटेन की शंका के बावजूद यूरोपीय देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति हो गई थी.

"तथ्य यह है कि हमने संकट को आते हुए नहीं देखा. हमारे पास इस पद्दति में जमा होते जोखिमों को मॉनीटर करने के औजार नहीं थे. और जब संकट आया तो हमारे पास उसका मुकाबला करने के प्रभावकारी यंत्र नहीं थे", बार्निये ने कहा.

वित्तीय सेक्टर पर नजर रखने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुपरवाइजरों की होगी. विश्व के सबसे बड़े वित्तीय केंद्र वाले देश ब्रिटेन ने जोर दिया है कि यूरोपीय एजेंसियों को सदस्य देशों की वित्तीय संप्रभुता में दखल देने का अधिकार नहीं होना चाहिए. आर्थिक आपातस्थिति की घोषणा का अधिकार यूरोपीय आयोग को नहीं बल्कि यूरोपीय सरकारों को होगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: एस गौड़

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