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ताना बाना

यूरोप में नया तलाक कानून

सोचिए एक जर्मन शख्स और एक फ्रांसीसी महिला में इटली में प्रेम हो जाता है और उनकी शादी हो जाती है. लेकिन अनबन के बाद वे पुर्तगाल चले जाते हैं, जहां उनका तलाक हो जाता है. है तो पेचीदा पर कइयों के लिए मददगार हो सकता है.

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कागजी कार्रवाई मुश्किल नहीं

यूरोप के लोग तलाक देने के लिए अब देश चुन सकते हैं. वे जहां चाहें, वहां के नियमों के मुताबिक तलाक कर सकते हैं. यूरोप के 27 में से 14 देशों में यह 2012 से लागू हो जाएगा.

यूरोपीय आयोग का कहना है कि 2007 में यूरोप में 10 लाख से भी ज्यादा तलाक हुए, जिनमें से लगभग 13,000 जोड़े अलग अलग नागरिकता वाले थे. नए नियम में जोड़ों को सुविधा होगी कि अलग होने के बाद चाहे वे अलग अलग देशों में रह रहे हों या किसी तीसरे मुल्क में, वे अपनी मर्जी से तलाक लेने का देश चुन सकते हैं.

यूरोपीय आयोग के जस्टिस कमिश्नर विवियेन रेडिंग ने कहा कि तलाक की त्रासदी के बाद पैसों और हिसाब किताब का भी खर्चा आ जाता है, जो बेहद भयंकर है. नए नियम से उन्हें फायदा हो सकता है.

इस वक्त यूरोपीय संघ के 20 देश यह तय करते हैं कि तलाक के वक्त किस देश का कानून लागू होगा, जबकि सात देशों में घरेलू कानून ही लागू होता है. दो साल बाद जो 14 देश नए कानून को लागू करेंगे, उनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, इटली, लात्विया, लक्जमबर्ग, माल्टा, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवेनिया और स्पेन शामिल हैं.

जब जोड़ों में आपसी रजामंदी नहीं बनेगी, तो अदालत तय करेगी कि कौन सा कानून लागू करना है.

रिपोर्टः एएफपी/ए जमाल

संपादनः एस गौड़

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