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दुनिया

यूरोप की शरणार्थी पॉलिसी पर सवाल

शरणार्थियों के लिए काम करने वाले संगठन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के अनुसार पिछले बीस सालों में भूमध्यसागर में 25000 शरणार्थियों ने जान गंवाई है. इनमें 2000 शरणार्थियों की 2011 में और 1700 की पिछले साल मौत हुई.

शरणार्थियों की बढ़ती संख्या से निबटने के लिए गुरुवार को इटली ने यूरोपीय संघ से भी मदद की मांग की. उत्तरी यूरोपीय देशों की ओर से आर्थिक और राजनैतिक सहयोग ना होने के कारण ईयू के भूमध्यीय सदस्य इसकी आलोचना करते रहे हैं. अभी तक यूरोपीय संघ में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे शरणार्थियों को बराबरी से अलग अलग देशों में बांटा जा सके.

सीरिया में चल रहे गृह युद्ध के दौरान 20 लाख लोगों ने पलायन किया और लाखों को विस्थापित होना पड़ा. 2011 में लीबिया में होने वाली हिंसा और अरब क्रांति के दौरान भी दक्षिण यूरोपीय देशों इटली, मालटा और स्पेन पर प्रवासन का दबाव रहा. इसके अलावा आर्थिक तंगी से जूझ रहे ग्रीस और साइप्रस भी इस दबाव को झेल रहे हैं.

इन देशों में शरणार्थियों के रहन सहन को लेकर स्वास्थ और कल्याण से जुड़ी सुविधाओं में भी अंतर है, जिसे जून में जेसियुट रिफ्यूजी सर्विस ने अमानवीय ठहराया था.

बेहतर तंत्र की जरूरत

लांपेडूजा जैसी त्रासदियों से बचने के लिए यूरोपियन कमीशन ने यूरोपियन एक्सटर्नल बॉर्डर सर्वेलेंस सिस्टम (यूरोसुर) बनाया है. इसका मकसद है गैर कानूनी प्रवासियों, युद्ध तस्करी तंत्र और परेशान शरणार्थियों के बारे में जानकारी रखना.

दिसंबर से सक्रिय होने जा रहे यूरोसुर के लिए 2014 से 2020 तक के लिए 24.4 करोड़ यूरो का बजट रखा गया है, जिसे अगले सप्ताह यूरोपीय संसद में पेश किया जाएगा. लेकिन कुछ ईयू नेताओं का मानना है कि इस तंत्र में खतरनाक तटवर्ती इलाकों में सुरक्षा कर्मियों को बढ़ाने के बारे में नहीं सोचा गया है.

इटली के लांपेडूजा द्वीप पर जहाज डूबने के समय मौजूद वहीं के एक दुकानदार आलेसांड्रो मरीनो ने बताया कि अपने साथियों के साथ वह दर्जनों को बचाने में कामयाब हुए, लेकिन उनकी आंखों के सामने सैकड़ों समुद्र में समा गए, "करीब 150 से 200 लोग पानी में डूब रहे थे. हम उनमें से 47 को ही बचा पाए, उससे ज्यादा कोशिश करते तो हम खुद ही डूब जाते." यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं. करीब 500 अफ्रीकी शरणार्थियों को ले जा रहे जहाज में आग लग गई थी. यह भूमध्यसागर में होने वाली अब तक की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है.

यूरोपियन ग्रीन पार्टी की मोनिका फ्रासोन कहती हैं, "इटली अभी तटों पर बढ़ रही शरणार्थियों की तादाद से निबटने के लिए तैयार नहीं है. यह पूरे ईयू की जिम्मेदारी है कि वह तंत्र को मानवीय और मजबूत बनाए."

खोलने होंगे दरवाजे

यूरोपियन कमीशन ने सदस्य देशों से यूरोसुर को जल्द से जल्द काम करने में सक्षम बनाने की गुहार की है. जून में ईयू ने मोरक्को के साथ मोबिलिटी पार्टनरशिप पर हस्ताक्षर किए जिससे छात्रों, रिसर्चरों और व्यापारियों को वीजा मिलने में आसानी हो. कमीशन इसी तरह के समझौते ट्यूनीशिया जैसे देशों के साथ भी करने की उम्मीद कर रहा है. कमीशन की प्रवक्ता मिशेल सेरसोन ने कहा, "हमें शरणार्थियों के लिए बेहतर नीतियों की जरूरत है."

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के अनुसार लांपेडूजा में हुई त्रासदी में अनियमित प्रवासन से जुड़े अपराधीकरण का भी हाथ है. प्रवासियों के मानवाधिकारों पर काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के फ्रांसुआ क्रेपो ने कहा कि अनियमित शरणार्थियों को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले दमनकारी तरीकों के चलते ऐसे हादसे होते हैं. उनके अनुसार अपने दरवाजे शरणार्थियों के लिए बंद करके यूरोपीय देश मानव तस्करों की ताकत को बढ़ावा दे रहे हैं. वह मानते हैं कि ईयू को कानूनी प्रवासन के रास्ते आसान कर देने चाहिए.

अगले हफ्ते ईयू के आंतरिक मामलों के मंत्रियों के बीच होने वाली चर्चा में कमीशन शरणार्थियों को फिर से बसाने पर भी जोर देगा. पिछले साल ईयू ने 102700 शरणार्थी आवेदनों को स्वीकृति दी थी. 2011 में यह संख्या 84300 थी. इनमें से दो तिहाई का जर्मनी (22000), स्वीडन (15300), ब्रिटेन (14600) और फ्रांस (14300) में पंजीकरण हुआ. पूरे यूरोप में अब तक केवल 52,000 सीरियाई शरणार्थी ही पंजीकृत हैं. संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार शरणार्थियों से प्रभावित देशों में सबसे आगे इटली है जहां सिर्फ अगस्त में ही 3000 शरणार्थियों ने पनाह ली.

एसएफ/आइबी(एएफपी)

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