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विज्ञान

यूरोप का सबसे ग्रीन शहर

चीड़ के पेड़, पहाड़, जंगल और झीलें. दक्षिणी स्वीडन का वैक्शो शहर कुछ ऐसा ही है. दोबारा इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा आम बात है और परिवहन के साधन बिलकुल साफ सुधरे हैं. यह यूरोप का सबसे ग्रीन शहर बनना चाहता है.

वैक्शो के स्थानीय परिषद के हेनरिक जोहानसन का कहना है, "हमने यह काम बहुत पहले शुरू कर दिया था. हमारे नेताओं ने 1960 के दशक में ही समझ लिया था कि अगर शहर को विकसित करना है, तो झीलों को साफ करना होगा. यहां 18वीं सदी से कपड़े का कारोबार होता था. उद्योग की वजह से झीलें गंदी हो गई थीं."

बदल गई झील

उन्होंने कहा कि ट्रूमन झील कभी अपनी बदबू के लिए बदनाम थी. लेकिन अब यह बिलकुल साफ है. 39 साल के जोहानसन कहते हैं, "जब मैं छोटा बच्चा था, तो मैं यहां डुबकी मारने के बारे में सोच भी नहीं सकता था. लेकिन आज आप ऐसा कर सकते हैं."

दुनिया भर में 1990 के दशक में ग्लोबल वार्मिंग सुर्खियां बनने लगीं. लेकिन इससे कहीं पहले ही इस शहर से एलान कर दिया था कि यहां 2030 तक प्राकृतिक ईंधन का इस्तेमाल खत्म कर दिया जाएगा और दो दशक के अंदर कार्बन उत्सर्जन आधा कर दिया जाएगा. यहां स्थानीय लोगों को साइकिल चलाने और कम कागज इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. 1993 के स्तर से आज वैक्शो का कार्बन उत्सर्जन आधा हो चुका है. प्रति व्यक्ति 2.7 टन, जो यूरोप में सबसे कम है. यह स्वीडन के दर का भी आधा है.

1970 के दशक में वैक्शो शहर कुछ अलग तरह से विकसित हुआ. शहर के बीच में एक बॉयलर था, जहां से गर्म पानी निकलता था. स्वीडन के लिए यह कोई अजूबा नहीं. लेकिन शहर में बिजली सप्लाई करने वाली सरकारी कंपनी ने तेल की जगह बायो ईंधन से ऊर्जा देने की योजना बनाई. यह ईंधन वन उद्योग से आता था.

जंगल से लेना देना

शहर से ठीक बाहर चल रहे प्लांट के निदेशक ब्योर्न वोलगास्ट का कहना है, "यह पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा है. स्वीडन के जंगल अभी भी उससे ज्यादा देते हैं, जितने की हमें जरूरत है. हम बाद में बचे हुए राख को जंगल में ही डालते हैं, जिससे वहां की उर्वरा शक्ति बनी रहे."

शहर में करीब 60,000 लोग रहते हैं. इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा लोग दोबारा इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा से पानी और हीटिंग का प्रयोग कर रहे हैं. इसी प्लांट से शहर की 40 फीसदी बिजली जरूरत भी पूरी हो रही है. यहां ऐसे फिल्टर लगाए गए हैं कि जहरीली गैसों के बाहर निकलने की संभावना कम से कम हो गई है. पूरे स्वीडन में जहरीले गैस के औसत उत्सर्जन का सिर्फ पांचवां हिस्सा.

लेकिन एक बहस बनी हुई है कि क्या वैक्शो वाकई यूरोप का सबसे स्वच्छ यानी ग्रीन शहर है. यहां रहने वाले लोग इस सवाल से चिढ़ते हैं. रेस्त्रां चलाने वाले गोएरान लिंडब्लाड कहते हैं, "हम खाने पीने की चीजों की रिसाइक्लिंग में क्यों देश के दूसरे हिस्सों से पीछे हैं." उन्होंने खुद सिर्फ दो साल पहले खाने की रिसाइक्लिंग का पहला प्लांट लगाया है.

कचरे से बस ईंधन

हालांकि ऑर्गेनिक कचरे को जमा करने की नगर परिषद की योजना बड़ी कारगर साबित हुई. अब शहर में ऐसी बसें दौड़ती हैं, जिनके लिए ईंधन सड़े हुए खाने से तैयार होता है. टिकाऊ ऊर्जा की जानकार क्रिस्टीना गारजीलो का कहना है, "अलग अलग आकार के शहरों की तुलना करना आसान नहीं है कि कह दिया जाए कि यह यूरोप का सबसे ग्रीन शहर है. लेकिन वे महत्वाकांक्षी हैं और काफी आधुनिक भी."

39 साल के इंजीनियर रायन प्रोवेंचर करीब 10 साल पहले अमेरिका के टेक्सास प्रांत से यहां आए थे. अब वे ग्रीन क्रांति में रच बस गए हैं, "हम लगभग हर चीज की रिसाइक्लिंग करते हैं. मैं हफ्ते में सिर्फ दो बार अपनी कार इस्तेमाल करता हूं. साइकिल से दफ्तर जाता हूं." प्रोवेंचर अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ वैक्शो शहर में रहते हैं. उनके घर की छत पर सोलर पैनल लगे हैं, बिजली खपत से ज्यादा पैदा होती है. वह कहते हैं कि उनके मां बाप वाको में रहते हैं और दोनों शहरों में "दिन और रात" जैसा फर्क" है, "वहां गैस इतनी सस्ती है कि कोई भी खरीदते वक्त नहीं सोचता."

कार या बेकार

हो सकता है कि वाको से वैक्शो की दूरी बहुत ज्यादा हो लेकिन कार को लेकर दोनों शहरों में एक जैसी सोच है. दोनों ही जगह लोग बिना कार के बाहर नहीं जाना चाहते. जोहानसन कहते हैं, "हम राष्ट्रीय बदलाव और कार पर निर्भर करते हैं. लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा साइकिल और बसों का इस्तेमाल हो."

सारी कंपनियां और उद्योग कार्बन डायोक्साइड का उत्सर्जन कम कर रहे हैं और जोहानसन कहते हैं, "हो सकता है कि 2030 तक हम 80 फीसदी कम कर लें."

एजेए/एमजे (एएफपी)

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