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दुनिया

यूरोपीय संघ को भाया पंचायती राज

यूरोप ने भारत की स्थानीय स्वशासन प्रणाली की जमकर तारीफ करते हुए इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई है. यूरोपीय संघ ने कहा है कि भारत के इस पंचायती राज मॉडल को दूसरे अन्य देशों में लागू कर ने की जरूरत है.

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भारत में यूरोपीय संघ की राजदूत दानिएल स्माज्जा ने केरल और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में पंचायती राज प्रणाली के तहत हो रहे कामकाज को देखने बाद कहा कि स्थानीय स्वशासन की यह पद्धति अपनाई जाने योग्य है. उन्होंने इसमें दिलचस्पी दिखाते हुए कहा कि विश्व में सत्ता के विकेन्द्रीकरण के प्रयासों को भारत के इस मॉडल के जरिए आगे बढ़या जा सकता है.

स्माज्जा ने कहा "मुझे लगता है कि संघीय ढांचे को मजबूत करने में जुटे देशों को भारत का यह मॉडल अपने देशों में लागू करना करना चाहिए. भारत में विकसित हुई इस पद्धति ने हमारे मन में भी दिलचस्पी पैदा कर दी है. मेरा मानना है कि इसे यूरोप और अफ्रीका के देशों में भी लागू करना चाहिए."

तिरुअनंतपुरम में स्थानीय स्वशासन प्रणाली पंचायती राज पर आयोजित सेमिनार में स्माज्जा ने कहा कि सत्ता से जुड़ी शक्तियां कुछ सीमित हाथों में केन्द्रित होने के बजाय इन्हें आम जनता के हाथों में सौंपा जाना ही गणतंत्रीय व्यवस्था वाले संघवाद का मूल मकसद है. भारत में लागू किया गया पंचायती राज इस मकसद को सही मायने में पूरा कर रहा है.

उन्होंने कहा "हम इसी खूबी को आपसे सीखने के लिए यहां आए हैं. इसे अपनी आंखों से देखकर हमारे मन में इसके लिए गहरी दिलचस्पी पैदा हुई है."

स्माज्जा ने कहा कि भारत और खासकर केरल विकेन्द्रीकरण के मामले में काफी आगे बढ़ चुके हैं. बाकी दुनिया को इसका अनुकरण करना चाहिए. पंचायती राज के मामले में भारत के अनुभव का लाभ उन सभी देशों को उठाने की जरूरत है जो सत्ता के विकेन्द्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर स्वशासन प्रणाली विश्व के अन्य देशों की इस जरूरत को पूरा कर सकती है क्योंकि भारत में पंचायती राज व्यवस्था अपने पूर्ण विकसित स्वरूप में आ चुका है. शेष विश्व को सिर्फ इसे लागू करने की जरूरत है.

रिपोर्टः एजेंसियां/निर्मल

संपादनः ए कुमार

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