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दुनिया

यूरोपीय संघ के लिए अहम तुर्की

तुर्की को कई सालों तक बीमार समझा जाता था. लेकिन अब तुर्की की आर्थिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उसकी बढ़ती भूमिका जर्मन चांसलर मैर्केल और तुर्की के प्रधानमंत्री रेचेप एर्दोआन में बातचीत का मुद्दा होंगे.

अंकारा पहुंची चांसलर मैर्केल को यूरोपीय संघ के ऊर्जा आयुक्त गुंटर ओटिंगर ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जर्मनी और फ्रांस जल्द ही तुर्की से यूरोपीय संघ में शामिल होने की भीख मांगेंगे. सीरियाई सीमा से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर कहरामनमारास में मैर्केल जर्मनी के सैनिकों से मिल रही हैं. उन्होंने कहा, "हमारे लिए जरूरी है कि हम कम से कम तुर्की की सीमा के भीतर रह रहे लोगों को बताएं कि हम उनकी रक्षा कर रहे हैं. और जो लोग सरहद के उस पार सीरिया के बाहर हिंसा फैलाना चाहते हैं, उन्हें संकेत दें कि हम नाटो के सदस्य देश में इस तरह की करतूत स्वीकार नहीं करेंगे." यहां जर्मनी के पेट्रियट मिसाइलें तैनात हैं. मैर्केल कापाडोकिया का भी दौरा करेंगीं जो ईसाइयों के लिए अहम जगह मानी जाती है. तुर्की में ईसाई अल्पसंख्यक भी मैर्केल की बातचीत का हिस्सा होंगे.

यूरोपीय संघ में तुर्की?

अंगेला मैर्केल की ही पार्टी क्रिस्टियन डेमोक्रैटिक यूनियन सीडीयू के नेता रूपरेष्ट पोलेंस भी मांग कर रहे हैं कि यूरोपीय संघ तुर्की को शामिल करने के लिए बातचीत शुरू करे. अब तक साइप्रस को लेकर झगड़ा तुर्की और ईयू के बीच दीवार बनकर खड़ा है. तुर्की नहीं चाहता कि ईयू के कस्टम्स संघ में ईयू के10 नए सदस्य देशों सहित साइप्रस को भी शामिल किया जाए.

2005 में तुर्की को ईयू में शामिल करने के लिए औपचारिक तौर पर बातचीत शुरू हुई. तुर्की इस बात से नाराज है कि अब तक ईयू के साथ वह केवल शिक्षा और शोध से संबंधित मुद्दों पर एकमत हो पाया है.

यूरोप और एशिया के बीच स्थित होने की वजह से तुर्की हमेशा सुर्खियों में रहा है. आर्थिक विकास दर बढ़ने से यूरोप के लिए तुर्की एक अहम साझीदार बन रहा है. 2010 और 2011 में आर्थिक विकास दर 9.2 और 8.5 प्रतिशत रहे. पिछले साल दर कम होने के बावजूद यूरो संकट और सीरिया में संघर्ष से तुर्की को ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है.

हालांकि तुर्की और जर्मनी के बीच कई मुद्दे हैं जो दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्तों में अड़ंगा डाल रहे हैं. मिसाल के तौर पर तुर्कों के लिए यूरोपीय संघ में वीजा की जरूरत और दो देशों की नागरिकता. मैर्केल इन दोनों मुद्दों पर अपने मत खुलकर तुर्की सरकार के सामने रखने वाली हैं. जर्मन गृह मंत्री हांस पेटर फ्रीडरिष ने दो हफ्ते पहले तुर्क नागरिकों के लिए जर्मन वीजा खत्म नहीं करने की बात कही थी.

वीजा पर बहस

जर्मनी में रह रहे तुर्क नागरिकों के लिए दो देशों के पासपोर्ट को अनुमति देने वाला मुद्दा भी जर्मनी ने खारिज कर दिया है. माना जा रहा है कि तुर्की पहुंची मैर्केल इस मुद्दे पर बहस ही नहीं करेंगी. उधर तुर्की का मानना है कि उसके व्यापारी जर्मनी में निवेश करना चाहते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि मैर्केल इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ के साथ जाना पसंद करेंगी और अलग से जर्मनी और तुर्की में इन मुद्दों पर समझौता नहीं करेंगीं. यूरोपीय संघ चाहेगा कि तुर्की ग्रीस की सरहद से पार हुए अपने शरणार्थियों को वापस ले, लेकिन तुर्की के लिए ऐसा करना मुश्किल हो सकता है.

लेकिन तुर्की यूरोपीय संघ में शामिल होने को तैयार है, यह इस बात से भी आंका जा सकता है कि पिछले साल अक्तूबर में एर्दोआन ने जर्मनी में रहने वाले तुर्की मूल के लोगों से कहा था कि उन्हें जर्मन संस्कृति समझने की कोशिश करनी चाहिए और गोएथे और कांत जैसे जर्मन बुद्धिजीवियों के बारे में और जानने की कोशिश करनी चाहिए. इससे पहले एर्दोआन ने खुद जर्मन नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि विदेशियों को जर्मन संस्कृति में शामिल करने की कोशिश "मानवता के खिलाफ" है.

आतंकवाद के खिलाफ सहयोग

जर्मनी और तुर्की केबीच धार्मिक उग्रवाद और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोध भी एक बड़ा मुद्दा है. जर्मनी में आलोचकों का कहना है कि सहयोग अपने आप में तो अच्छा है लेकिन इसे और बेहतर करना होगा. दोनों देशों के गृह मंत्री इस सिलसिले में मिलेंगे. मैर्केल और एर्दोआन के बीच सीरिया, ईरान और मध्यपूर्व संकट को लेकर भी बातचीत होगी.

रिपोर्टः बाहा गुंगोर/एमजी

संपादनः ए जमाल

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