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दुनिया

यूरोपीय संघ के बजट पर सहमति

यूरोपीय संघ की सरकारों और संसद में 2014 के बजट पर सहमति हो गई है इसके साथ ही कई महीनों से चली आ रही खींचतान भी खत्म हो गई. ईयू का ज्यादातर पैसा संघ के 28 देशों में कृषि और गरीब देशों की मदद जैसे कामों में खर्च होता है.

यूरोपीय संघ के बजट आयुक्त यानोश लेवान्डोव्सकी ने बताया, "करार...यूरोपीय कारोबार, वैज्ञानिकों, शहरों, इलाकों और छात्रों के लिए ऐसे समय में निवेश के मौके देगा जब उन्हें निवेश की बहुत ज्यादा जरूरत है." यूरोपीय विधायिका और राष्ट्रीय सरकारें बजट के मामले पर बार बार उलझती रही हैं. उनके बीच सबसे बड़ी समस्या यह तय करने की है कि आर्थिक संकट में फंसे संघ को बाहर निकालने के लिए किस ओर कदम बढ़ाए जाएं. हालांकि अब यूरोपीय संघ की आर्थिक मुश्किलें कुछ कुछ हल्की पड़ती दिख रही हैं.

मंगलवार को हुए करार के बाद उम्मीद की जा रही है कि यूरोपीय संसद 2014-20 के लिए यूरोपीय संघ के बजटीय ढांचे को पास कर देगा, जिसका बेसब्री से इंतजार है. इस ढांचे के पास होने का मतलब है कि अगले सात साल में अधिकतम खर्च की सीमा 960 अरब यूरोप तय हो जाएगी. लेवान्डोव्स्की ने ब्रसेल्स में 16 घंटे चली बहस के बाद पत्रकारों से कहा, "साफ है कि हम लोगों पर वक्त का दबाव है. चर्चा के लंबा खिंचने में किसी का फायदा नहीं है...हमें काम करना होगा." चर्चा शुरू होने से पहले आयरिश विदेश मंत्री ब्रायन हायेस ने कहा, "पिछले कई साल में आर्थिक संकट के कारण हमने बहुत कुछ देखा है. अगर यूरोप अपने बजट पर रजामंद नहीं हो सकता तो मुझे लगता है कि इससे बहुत खराब संकेत जाएगा."

बजट पर हुए करार में साल 2014 के लिए 135.5 अरब यूरो खर्च करने की बात कही गई है. यूरोपीय संसद इससे पहले यह रकम 136.4 अरब यूरो रखने के लिए दबाव बना रही थी जबकि सरकारें इसे 135 अरब यूरो पर सीमित रखना चाहती थीं. लेवान्डोव्स्की ने इस समझौते को "समुचित" कहा है लेकिन इसके साथ ही इस बात से इनकार नहीं किया कि बजट के कुछ छेदों के बंद करने के लिए और पैसों की जरूरत होगी.

दोनों पक्षों ने 40 करोड़ यूरो के उस फंड को हासिल करने पर भी सहमति हासिल कर ली है, जिसे जर्मनी, ऑस्ट्रिया और चेक रिपब्लिक को बाढ़ से निपटने के लिए देने का वादा किया गया था. हालांकि इतना सब करने के बाद भी बजट पर समझौता सर्वसम्मति से नहीं हुआ है. लिथुआनिया के वित्त मामलों के उप मंत्री अल्गिमानतास रिमकुनास ने बताया कि चार देश "वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं रह सके थे." इस समय यूरोपीय संघ की अध्यक्षता लिथुआनिया के पास ही है. ब्रिटेन, डेनमार्क, नीदरलैंड्स और स्वीडन ने पहले घरेलू बजट दबाव की ओर इशारा करते हुए ज्यादा बचत करने की मांग की थी.

एनआर/एएम (डीपीए)

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