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दुनिया

यूरोपीय विदेश सेवा बनाने पर सहमति

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के विदेश मंत्री यूरोपीय विदेश सेवा के राजनीतिक लक्ष्यों और उसकी आधारभूत संरचना पर सहमत हो गए हैं. इस सेवा का लक्ष्य विश्व मंच पर यूरोपीय संघ की आवाज़ को मजबूत बनाना है.

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गीडो वेस्टरवेले

यूरोपीय विदेश आयुक्त कैथरीन एशटन ने भी फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा, "मुझे खुशी है कि परिषद मेरे प्रस्तावों के आधार पर राजनीतिक सहमति पर पहुंची है." एशटन 8,000 राजनयिकों वाली भावी विदेश सेवा का नेतृत्व करेंगी.

इस सहमति के बावजूद अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. सभी पक्ष मानते हैं कि यूरोपीय विदेश सेवा पर हुई सहमति एक ऐसा समझौता है जिसकी संरचना, काम और बजट पर अभी और बातचीत होनी है. यूरोपीय संघ के वर्तमान अध्यक्ष स्पेन के विदेश मंत्री मिगेल एंजेल मोराटीनोस ने कहा कि वे इस पर ज़ोर देंगे कि यह यूरोप के लिए विशेष दिन है क्योंकि यह एक मजबूत, साझा यूरोपीय आवाज़ की दिशा में एक लम्बे रास्ते की शुरुआत है. यूरोपीय विदेश सेवा के 136 देशों में मिशन होंगे.

Belgien EU Parlament Anhörung Catherine Ashton

कैथरीन एशटन

लिसबन संधि के तहत हुए सुधारों के ज़रिए विदेश सेवा बनाने की नींव रखी गई है. लेकिन इस परियोजना पर हुई बहस में यूरोपीय संसद ने बजट में बाधा डालने की धमकी भी है. यूरोपीय संसद के तीन प्रमुख राजनीतिक गुटों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे राजनयिक सेवा के पुराने मसौदे का अनुमोदन नहीं करेंगे. ये देखना बाकी है कि क्या मसौदे में हुए संशोधन को वे स्वीकार करेंगे.

इटली के विदेश मंत्री फ़्रांको फ़्राटीनी ने कहा है कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के नेताओं की जून में होने वाली बैठक में इस पर विचार होगा और उन्हें उम्मीद है कि जुलाई में संसद इसका अनुमोदन कर देगी. संघ के 27 देशों के बीच मुख्य बहस यह है कि सेवा में चेन ऑफ कमांड क्या होगी. चुनाव अभियान में फंसा ब्रिटेन यूरोपीय विदेश सेवा को कंसुलर अधिकार नहीं देना चाहता. अब हुए समझौते के अनुसार सदस्य देश के आग्रह पर यह अधिकार दिया जा सकता है.

सदस्य देशों की एक और चिंता यह भी है कि उनके अपने राजनयिकों का नई सेवा में कितना प्रतिनिधित्व होगा. समझौते में तय किया गया है कि जुलाई 2013 तक यूरोपीय विदेश सेवा के एक तिहाई कर्मी राष्ट्रीय विदेश सेवाओं से आएंगे.

जर्मन विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले ने संस्थानों के विभिन्न हितों के लिए समझ का इजहार किया है और कहा है कि लक्ष्य यह है कि हम सबको साथ ला सकें ताकि हम सचमुच एक आवाज़ में बोल सकें. वेस्टरवेले ने यह मांग मनवा ली कि फ़्रेंच और अंग्रेज़ी के अलावा जर्मन भी संघ की औपचारिक भाषा होगी. ये स्पष्ट नहीं है कि विदेश सेवा में नियुक्ति के लिए जर्मन का ज्ञान ज़रूरी होगा या नहीं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: एस गौड़

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