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जर्मन चुनाव

यूरेनियम संवर्धन पर बातचीत नहीं होगीः ईरान

इस्तांबुल में दुनिया के ताकतवर देशों के गुट से ईरान की बातचीत के बीच ईरान ने कहा है कि परमाणु संवर्धन के मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही है. ईरान के वार्ताकार सईद जलील के सहयोगी अबोलफज्ल जोहरेवांद ने ये बात कही.

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ताकतवर देशों के प्रतिनिधि ईरान को बातचीत की मेज पर इसलिए लेकर आए हैं जिससे कि उसके साथ परमाणु सहयोग की शुरुआत हो सके और साथ ही ईरान को परमाणु बम बनाने से रोका जा सके. दुनिया भर की निगाहें इस्तांबुल में हो रही इस बातचीत पर टिकी हुई हैं. यहां अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जर्मनी और चीन के प्रतिनिधि ईरान के परमाणु वार्ताकार सईद जलील के साथ बातचीत कर परमाणु सहयोग पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

यूरेनियम नहीं है मुद्दा

इस बीच सईद जलील के सहयोगी ने ये साफ कर दिया कि बातचीत का मुद्दा यूरेनियम संवर्धन नहीं है. अबोलफज्ल ने कहा, "हम बातचीत को हमारे मूलभूत यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को रोकने की दिशा में बिल्कुल भी नहीं ले जाने देंगे."

Iran Energie Atomkraftwerk Inbetriebnahme Atomreaktor Buschehr

अबोलफज्ल ने ये बात सईद जलील के अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बातचीत शुरू होने के तुरंत बाद कही. बातचीत दो दिनों तक चलेगी. अबोलफज्ल ने पत्रकारों को बताया कि बातचीत सकारात्मक सोच के साथ शुरू हुई है. उन्होंने कहा, "बातचीत में सहयोग पर चर्चा हो रही है. दोनों पक्ष सकारात्मक सोच के साथ आए हैं."

अड़ियल ईरान

दोनों पक्ष के बीच 14 महीने की तनातनी के बाद, पिछले महीने जिनेवा में बातचीत दोबारा शुरु हुई और अब दूसरे दौर की बातचीत हो रही है. ईरान जोर देकर ये बात कह रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वो यूरेनियम का संवर्धन बंद नहीं करेगा. उच्च स्तर के यूरेनियम संवर्धन से परमाणु बम बनाया जा सकता है और यही चिंता ताकतवर देशों को परेशान कर रही है. ईरान के इस मुद्दे पर अड़ियल रवैया अपनाने के कारण उस पर संयुक्त राष्ट्र ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. इसके अलावा अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी उस पर पाबंदियां लगा दी है.

ताकतवर देशों का गुट अब ईरान को परमाणु लेनदेन पर रजामंद करने की कोशिश कर रहा है जिस पर सबसे पहले 2009 में चर्चा हुई थी. इस प्रस्ताव को कुछ बदलावों के साथ ईरान के सामने पेश करने की योजना है. 2009 में इस प्रस्ताव में कहा गया था कि ईरान को तेहरान के मेडिकल रिसर्च रिएक्टर के लिए संवर्धित यूरेननियम फ्रांस और रूस देंगे. इसके बदले में उसे अपना संवर्धित यूरेनियम भंडार खत्म करना होगा. काफी दिनों तक इस प्रस्ताव पर विवाद चलता रही. ब्राजील और तुर्की ने मई में इसके बीच का एक रास्ता निकालने की कोशिश की लेकिन अमेरिका ने इसे खारिज कर दिया. अमेरिका का कहना है कि इस दौरान ईरान ने बहुत ज्यादा यूरेनियम संवर्धित कर ली है और उस पर संयुक्त राष्ट्र के चौथे दौर के प्रतिबंध लगा दिए गए.

प्रतिबंधों के खिलाफ तुर्की

तुर्की ने प्रतिबंधों के प्रस्ताव का विरोध किया था. इस्तांबुल में हो रही बातचीत के लिए वो सिर्फ मेजबानी कर रहा है हालांकि उसने कहा है कि दोनों पक्षों की मांग पर वो बातचीत में सहयोग करने के लिए हर वक्त तैयार है. अमेरिका ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान पर भरोसा जमाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए और जिससे कि परमाणु कार्यक्रम पर उठ रहे संदेह दूर किए जा सके. अमेरिका मानता है कि भरोसा जमाने की प्रक्रिया में ईरान की भी बड़ी भूमिका है.

बातचीत शुरू होने से पहले रूस ने कहा ईरान पर से संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन बाकी पश्चिमी देश इस पर रजामंद नहीं हुए. बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने तेहरान में लोगों की एक बड़ी भीड़ के सामने कहा कि वो अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेंगे. अहमदीनेजाद ने कहा, "आप हमें परमाणु ताकत बनने से नहीं रोक सकते, ईरान एक ईंच भी पीछे नहीं हटेगा."

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः उ भट्टाचार्य

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