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दुनिया

यूपी की यूनिवर्सिटी में नेतागीरी का कोर्स

उत्तर प्रदेश के एक विश्वविद्यालय ने बाकायदा नेता तैयार करने की ठान ली है. यहां पीजी कोर्स शुरू हो रहा है, जिसमें नेता बनने के सभी गुण बताए जा रहे हैं. यानी छात्र संघ की भी तस्वीर बदलने वाली है.

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अभी तक विश्वविद्यालय के छात्र संघों से ही नेता निकलते रहे हैं लेकिन शायद देश में पहली बार एमिटी विश्वविद्यालय प्रशिक्षित नेता बनाने की तैयारी कर रहा है. इस विश्वविद्यालय के अगले सत्र से बाकायदा नेता बनने के लिए अलग से एक वर्षीय पीजी कोर्स शुरू किया जाएगा. इसमें स्नातक पास किए हुए छात्रों को ही प्रवेश दिया जाएगा. यह जानकारी एमिटी ग्रुप के संस्थापक अशोक चौहान ने दी.

चौहान ने बताया कि जिस विभाग में ये कोर्स शुरू किया जाएगा उसका नाम 'एमेटी इंस्टीट्यूट फॉर पॉलीटिकल लीडरशिप एंड पोल्स स्ट्रेटजी' रखा जाएगा. उनका कहना है कि इन दिनों सारी राजनीतिक पार्टियां युवाओं पर ध्यान दे रही हैं. इसलिए उनको तैयार करने के लिए यह कोर्स शुरू किया जा रहा है. नेतागीरी के लिए शुरू करने वाले कोर्स को पढ़ाने के लिए मनोविज्ञान और मैनेजमेंट के प्रोफेसरों की फैकल्टी बनाई जाएगी और राजनेताओं को गेस्ट लेक्चरर के रूप में आमंत्रित किया जाएगा.

उनके मुताबिक इसकी फीस कम रखी जाएगी ताकि ग्रामीण परिवेश के छात्र भी इसमें आसानी से दाखिला ले सकें. इस कोर्स में राजनीति के अच्छे संस्कार और आचरण सहित राजनीति की तकनीक सिखाई जाएगी. मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि अगले साल मार्च-अप्रैल से इस कोर्स को शुरू करने की तैयारी है. उन्होंने बताया कि 'मेकिंग ऑफ पोलिटिशियन' कोर्स का पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है जिसमें देश के जाने माने विद्वानों का सहयोग लिया गया है.

कोर्स की तैयारी में वरिष्ठ राजनेताओं की सलाह ली जा रही है. उन्होंने बताया कि राजनेताओं के गेस्ट लेक्चर के लिए उन्हीं को आमंत्रित किया जाएगा जो राजनीति में आदर्श प्रस्तुत करते हों और जिनकी छवि समाज में स्वीकार्य हो.
इस मामले में प्रदेश के पूर्व मंत्री आरके चौधरी का कहना है कि राजनीतिक व्यक्तित्व की अपनी खूबियां होती हैं. उसके लिए किसी प्रशिक्षण की जरूरत नहीं है. इंजीनियरिंग या डॉक्टरी की तरह इसकी शिक्षा नहीं दी जा सकती. लेकिन इसके बावजूद अगर इस तरह के कोर्स शुरू किए जा रहे हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए. जबकि बिहार से जेडीयू के सांसद अली अनवर का कहना है कि इस देश का नेता के सबसे शिक्षित या प्रशिक्षित होने की बात अलग है लेकिन नेतागीरी कोई क्या सिखाएगा.

रिपोर्टः सुहेल वहीद, लखनऊ

संपादनः ए जमाल

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