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दुनिया

यूनिसेफ: सीरिया के बच्चों को ना भूलें

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली एजेंसी यूनिसेफ ने बताया है कि पूरे मध्य पूर्व इलाके में करीब डेढ़ करोड़ बच्चे सीरिया और इराक के कई हिस्सों में चल रही जंग के बुरे नतीजे भुगत रहे हैं.

यूएन एजेंसी यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि मध्यपूर्व के इन इलाकों के बच्चे शांति का माहौल भूल से गए हैं. बीते चार सालों से युद्ध के माहौल में जीने के कारण उन्हें स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव झेलना पड़ रहा है. यूनिसेफ के निदेशक एंथनी लेक बताते हैं, "बहुत छोटे बच्चों ने तो केवल संकट ही देखा है. महत्वपूर्ण उम्र में प्रवेश करते हुए किशोरों ने हिंसा और तकलीफ झेली है, जिससे सिर्फ उनका बीता हुआ कल ही नहीं बल्कि भविष्य भी प्रभावित हो रहा है."

लेक का मानना है कि इन दोनों ही देशों की युवा पीढ़ी में हिंसा के चक्र में फंसे रहने का खतरा बना हुआ है. यूनिसेफ ने मांग की है कि यहां के छोटे बच्चों और किशोरों की जरूरतें पूरी करने के लिए दीर्घकालीन निवेश किए जाएं. सीरिया और इराक के तमाम ऐसे बच्चों की प्रतिभा के विकास पर ध्यान दिया जाए और उन्हें स्थाई और सुरक्षित भविष्य बनाने की ओर प्रेरित किया जाए. यूनिसेफ ने कहा, "सीरिया संकट के पांचवे साल में प्रवेश करने के समय देश में ऐसे 56 लाख से भी अधिक बच्चे हैं, जिनकी स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है."

अब तक इकट्ठा आंकड़ों के अनुसार करीब 20 लाख बच्चे सीरिया के उन इलाकों में रह रहे हैं, जहां भारी गोलाबारी चल रही है और किसी भी तरह की मानवीय सहायता उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा करीब 20 लाख सीरियाई बच्चे ऐसे हैं जो लेबनान, तुर्की, जॉर्डन और दूसरे देशों में शरणार्थी का जीवन जीने को मजबूर हैं. यूनिसेफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 36 लाख बच्चे उन कमजोर समुदायों के हैं, जो इन शरणार्थियों की मेजबानी कर रहे हैं. अचानक उनके क्षेत्र में शरणार्थियों की तादाद बढ़ जाने से उनकी खुद की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोझ बढ़ा है.

PK zu Unicef-Bericht über syrische Kinder

सीरियाई बच्चों पर यूनिसेफ की रिपोर्ट

जेनेवा में एक प्रेस कांफ्रेंस में बोलते हुए यूनिसेफ की सीरिया प्रतिनिधि हाना सिंगर ने कहा है कि यूएन के सदस्य राष्ट्रों को इस्लामिक स्टेट पर इस बात का दबाव बनाना चाहिए कि वे यूनिसेफ को आईएस के नियंत्रण वाले इलाकों में जाने दें. सिंगर ने कहा कि आतंकी समूह से बातचीत की जानी चाहिए ताकि "कम से कम बच्चों को तो बचाया जा सके."

मार्च 2011 में लोकतंत्र समर्थकों के विरोध प्रदर्शन के साथ शुरु हुए सीरियाई संकट में अब तक दो लाख से भी ज्यादा लोग मारे गए हैं. 2011 के उस विरोध प्रदर्शन ने अब बिगड़ते हुए गृह युद्ध का रूप ले लिया है. यूनिसेफ के अनुसार इससे संबंधित संकट के कारण इराक में भी 28 लाख से ज्यादा बच्चे हथियारबंद आतंकी गुटों के नियंत्रण वाले इलाकों में फंसे हुए हैं. आईएस ने इस समय सीरिया और पड़ोसी देश इराक के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है और कई महीनों से वहां हिंसक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.

आरआर/एमजे(डीपीए, रॉयटर्स)

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