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दुनिया

यूक्रेन से हटेंगे 1000 भारतीय

भारत अपने लगभग 1000 नागरिकों को यूक्रेन से निकालने के उपाय कर रहा है. ये लोग हिंसाग्रस्त लुगांस्क इलाके में फंसे हुए हैं. इनमें से ज्यादातर छात्र हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मुहम्मद अकबरुद्दीन ने दिल्ली में कहा, "वहां करीब 1000 नागरिक हैं, जिनमें से ज्यादातर मेडिकल छात्र हैं. उन्हें वहां से निकाला जा रहा है."

यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने एक आपात नोटिस लगाया है. उनमें कहा गया है कि लुगांस्क इलाके से राजधानी कीव आने के लिए 500 ट्रेन टिकट उपलब्ध हैं. ये टिकट मंगलवार और बुधवार के लिए उपलब्ध हैं. नोटिस में इमरजेंसी नंबर भी दिए गए हैं, जहां संपर्क किया जा सकता है.

पिछले कुछ दिनों में लुगांस्क में हिंसा भड़की है, जहां रूस के समर्थक और विरोधी बलों के बीच संघर्ष चल रहा है. भारत की प्रमुख समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि वहां फंसे भारतीयों को यूक्रेनी सरकार की मदद से वहां से निकाला जा रहा है.

जिन छात्रों का दाखिला भारत के बड़े मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थानों में नहीं होता, वे डोनेशन देकर रूसी और यूक्रेनी संस्थानों में दाखिला लेते हैं. यह सिलसिला पूर्व सोवियत संघ के वक्त से चला आ रहा है. नई दिल्ली में यूक्रेनी दूतावास की वेबसाइट पर लिखा है, "1957 से भारतीय छात्र यूक्रेनी यूनिवर्सिटियों में पढ़ते आ रहे हैं." हालांकि उस वक्त यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था.

वेबसाइट पर जानकारी दी गई है, "शैक्षणिक वर्ष 2012-13 में 3839 भारतीय नागरिकों ने यूक्रेन में उच्च शिक्षा हासिल की. इनमें से ज्यादातर मेडिकल छात्र थे."

हाल ही में यूक्रेन में राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ, जिसमें पेट्रो पोरोशेंको जीते हैं. हालांकि चुनाव के बाद भी यहां हिंसा नहीं थम रही है.

एजेए/एमजे (एएफपी)

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