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दुनिया

यूक्रेन में जर्मन-फ्रांसीसी मध्यस्थता

पूर्वी यूक्रेन में लड़ाई रुकवाने के प्रयास में अब जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद सीधे शामिल हो गए हैं. अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन ने मैर्केल के प्रयासों की आलोचना की है.

यूक्रेन में शांति के लिए पश्चिमी देशों का यह अब तक का सबसे महत्वपूर्ण प्रयास है. पहले जर्मन और फ्रांसीसी नेता अपनी योजना के साथ अचानक कीव पहुंचे और उसके बाद मॉस्को. यूक्रेन के राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको ने मैर्केल और ओलांद के साथ बातचीत के बाद कहा कि वे संघर्षविराम की उम्मीद देखते हैं. लेकिन इस उम्मीद का पूरा होना इस बात पर निर्भर करेगा कि रूस क्या प्रतिक्रिया देता है. ओलांद ने कहा है कि संघर्ष विराम पहला कदम है, उसके बाद विवाद का व्यापक हल जरूरी है. जर्मन चांसलर ने यह साफ कर दिया है कि उनका मध्यस्थता प्रयास तटस्थ मध्यस्थता नहीं है, वे राष्ट्रीय और यूरोपीय हितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. बातचीत के केंद्र में यूरोपीय शांति व्यवस्था और जनता का स्वनिर्णय का अधिकार है.

जर्मन-फ्रांसीसी मध्यस्थता प्रस्ताव के बारे में अभी सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन गुरुवार को कीव पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि यह रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन द्वारा दिए गए प्रस्ताव के जवाब में है. अमेरिका के प्रमुख सीनेटर जॉन मैक्केन ने जर्मन चांसलर की यूक्रेन नीति की कड़ी आलोचना की है. सीनेट की रक्षा समिति के प्रमुख मैक्केन ने कहा, "यदि जर्मन सरकार का रुख देखें तो लगता है कि उन्हें कुछ पता नहीं है या उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि यूक्रेन के लोग मारे जा रहे हैं."

रिपब्लिकन सीनेटर ने मैर्केल के रवैये की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तुष्टिकरण की नीति से की. इसे 1930 के दशक में नाजी जर्मनी की शुरुआती सफलताओं का कारण माना जाता है. मैक्केन पिछले कई महीनों से अलगाववादियों से लड़ने के लिए यूक्रेन को हथियार दिए जाने की मांग कर रहे हैं. यूरोपीय देशों की चिंता है कि यूक्रेन में हथियारों की सप्लाई से हालात और बिगड़ सकते हैं और स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती है. ब्रसेल्स का दौरा कर रहे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि यूक्रेन अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप को एकजुट होकर यूक्रेन का साथ देना चाहिए.

इस बीच यूक्रेनी सेना और अलगाववादियों के बीच लड़ाई का सामना कर रहे देबालजेवे शहर से अच्छी खबर आई है. डोनेस्क और लुगांस्क के बीच स्थित शहर में दोनों पक्ष कुछ घंटों के संघर्षविराम के लिए राजी हो गए हैं. एएफपी के एक रिपोर्टर के अनुसार शहर से नागरिकों को निकालने के लिए 25 बसें पहुंची हैं. देबालजेवे रेल के जंक्शन पर स्थित सामरिक महत्व का शहर हैं, जहां एक हफ्ते से यूक्रेनी सेना और विद्रोहियों के बीच लड़ाई हो रही है. अब तक शहर पर यूक्रेनी सेना का नियंत्रण था. अब विद्रोही उन्हें घेरने की कोशिश कर रहे हैं.

एमजे/आरआर (एएफपी, डीपीए)

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