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दुनिया

यूक्रेन पर मैर्केल की मुश्किल कूटनीति

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल यूक्रेन शांति के मुद्दे लेकर अपने अगले कूटनीतिक दौरे पर अमेरिका में हैं. अमेरिका में यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई पर बहस चल रही है. सवाल यह है कि क्या मैर्केल की कूटनीति कामयाब होगी.

अंगेला मैर्केल एक संदेश और एक आशंका के साथ वाशिंगटन गई हैं. संदेश यह है कि अमेरिका यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति न करे क्योंकि इससे इलाके में नए शीतयुद्ध का खतरा है. उनकी आशंका यह है कि अगर जर्मन-फ्रांसीसी कूटनीति सफल नहीं होती है तो अमेरिका कीव को हथियारों की सप्लाई कर सकता है. मैर्केल यूक्रेन में शांति के लिए वार्ता और कूटनीति को प्राथमिकता दे रही हैं, तो वहीं अमेरिका यूक्रेन के आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दे रहा है.

मैर्केल के लिए यूक्रेनी सेना को हथियार देना कोई विकल्प नहीं है क्योंकि ये हथियार रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की महत्वाकांक्षा को कम नहीं करेंगे. उन्हें पूरा विश्वास है कि इससे हिंसा का चक्र शुरू हो जाएगा जो इलाके में और अधिक तकलीफें और मौतें लेकर आएगा. ये बात उन्होंने वीकएंड में म्यूनिख के सुरक्षा सम्मेलन में भी कहीं. इसके विपरीत जॉन मैक्केन सहित अमेरिका के कई ताकतवर सीनेटरों का कहना है कि यूक्रेन को हथियार देना मॉस्को के लिए डर का कारण साबित होगा.

इस बीच लिथुएनिया ने यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई का पक्ष लिया है. विदेश मंत्री अंतानास लिंकेविसिउस ने कहा है कि यूक्रेन अतिक्रमण का शिकार है, जिसमें दूसरा पक्ष हथियारों की सप्लाई कर रहा है. उन्होंने कहा कि मामला सैनिकों को भेजने का नहीं है बल्कि वे सुरक्षात्मक हथियारों की आपूर्ति को तार्किक नतीजा मानते हैं.

एमजे/आरआर (डीपीए, एएफपी)

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