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दुनिया

यूक्रेन ने नहीं बुलाया अलगाववादियों को

यूक्रेन की सरकार ने सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए राजधानी कीव में यूरोप समर्थित शांति योजना के तहत गोलमेज सम्मेलन बुलाया है, लेकिन आजादी की घोषणा करने वाले मॉस्को समर्थक विद्रोहियों को नहीं बुलाया है.

यूक्रेन में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से डेढ़ हफ्ते पहले गोलमेज सम्मेलन का मकसद देश में शांति की स्थापना है. अंतरराष्ट्रीय तौर पर इस पहल की सराहना हुई है लेकिन कीव में होने वाली वार्ता का नतीजा क्या होगा यह साफ नहीं है. देश के पूर्वी हिस्से में यूक्रेन से स्वायत्तता के लिए जनमत संग्रह कराने वाले हथियारबंद अलगाववादियों को इस बैठक में नहीं बुलाया गया है. बुधवार को भी पूर्वी यूक्रेन से नई लड़ाईयों की खबर है, जबकि जर्मन विदेश फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर फ्रांस में यूक्रेनी मसले पर परामर्श कर रहे हैं.

एक दिन पहले विद्रोहियों ने पूर्वी यूक्रेन में सात सैनिकों को मार दिया. सात अप्रैल से अलगाववादियों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई के दौरान ये सबसे बड़ा नुकसान है. ये हिंसा पश्चिम की शांति की कोशिशों को भी धता बताती है.

गोलमेज वार्ता यूरोप में सहयोग और सुरक्षा संगठन ओएससीई के रोड मैप पर आधारित है, लक्ष्य है जितने लोगों को शामिल किया जा सके उतना अच्छा. बैठक में सरकारी अधिकारियों के अलावा प्रधानमंत्री और सांसद, पूर्व नेता और 25 मई को यूक्रेन के राष्ट्रपति चुनावों के उम्मीदवार भी शामिल होंगे. लेकिन पूर्वी यूक्रेन के शहरों पर कब्जा करने वाले और आजादी की कोशिशों में लगे अलगाववादी नेताओं को इसमें नहीं बुलाया गया है.

डर्टी गेम

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यूक्रेनी नेतृत्व अब सबको साथ लेकर चलने वाले राष्ट्रीय एकता के संवाद के लिए खुला है. "लेकिन इसमें उन आतंकियों को मिलाना संभव नहीं है जिनका लक्ष्य विनाश है, सिर्फ राष्ट्रीय एकता का ही नहीं बल्कि यूक्रेन का भी." साथ ही उन्होंने रूस पर "गंदा खेल" खेलने का भी आरोप लगाया. जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने बातचीत को बुरे संकट का हल निकालने के लिए "अच्छी संभावना" बताया है. उन्होंने कहा, "राउंड टेबल पर जितने प्रतिनिधि हों अच्छा है. लेकिन हिंसा का समर्थन करने वालों के लिए इसमें कोई जगह नहीं."

सोमवार को ही यूरोपीय संघ के नेताओं ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं और चेतावनी दी है कि अगर 25 तारीख के चुनाव नहीं होते हैं तो उसे दूरगामी परिणामों का सामना करना होगा. ओएससीई की योजना का समर्थन करते हुए रूस ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन के पश्चिम समर्थक अधिकारी अलगाववादियों से बात नहीं कर "सच्चे संवाद" को ठुकरा रहे हैं. वह मांग कर रहा है कि सरकार पूर्वी हिस्से में अलगाववादियों पर सैन्य कार्रवाई बंद करे तभी वो शांति का प्रस्ताव मानेंगे. रूस ने कहा है कि क्षेत्रीय अधिकारों पर बातचीत राष्ट्रपति चुनावों के पहले होनी चाहिए.

रविवार को पूर्वी यूक्रेन में हुए कथित जनमत संग्रह के बाद यूक्रेन के भविष्य को लेकर चिंता और गहरी हो गई है. कीव और पश्चिमी देशों ने जनमत संग्रह को अवैध करार दिया. कीव की चिंता है कि मार्च में जिस तरह क्रीमिया को रूस ने अपनी सीमा में मिला लिया था उसी तरह वो पूर्वी यूक्रेन के इलाकों को भी अपने में मिला सकता है.

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क ने नाटो और यूरोपीय संघ से तेज कार्रवाई की मांग की है और कहा कि सच में ऐसा डर है कि यूक्रेन बंट सकता है.

एएम/ (एएफपी, डीपीए)

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