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दुनिया

यूक्रेनी नेताओं का एकता का वादा

नए चुने नेताओं ने वादा किया है कि वह देश को दो हिस्सों में नहीं बंटने देंगे. अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि यह मामला पूर्व पश्चिम का नहीं है, बल्कि यूक्रेन निवासियों के भविष्य का है.

नए चुने नेताओं ने वादा किया है कि वह देश को दो हिस्सों में नहीं बंटने देंगे. अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि यह मामला पूर्व पश्चिम का नहीं, बल्कि यूक्रेन निवासियों के भविष्य का है.

अमेरिकी और यूरोपीय संघ के कूटनीतिज्ञ यूक्रेन में विपक्षी नेताओं से मिले हैं. वहीं राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच की सत्ता ढहने के बाद रूस की प्रतिक्रिया थोड़ी नर्म हुई है.

इधर अमेरिका के उप विदेश मंत्री विलियम बर्न्स विपक्ष के नेताओं से मिलने कीव पहुंचे हैं. विदेश मंत्री केरी ने कहा है, "यह नुकसान फायदे का खेल नहीं और पश्चिम पूर्व का भी नहीं. यह यूक्रेन के लोगों के बारे में है और निवासियों ने अपने भविष्य के बारे में जो फैसला किया है उसके बारे में है."

यानुकोविच के खिलाफ विरोध की शुरुआत नवंबर 2013 में तब हुई जब राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ समझौते पर साइन करने से इनकार कर दिया और मॉस्को के साथ रिश्ते बढ़ाने की शुरुआत की. 100 लोगों की जान लेने वाला यह हिंसक विरोध प्रदर्शन और पुलिस की गोलीबारी तब खत्म हुई, जब विपक्ष, यानुकोविच, यूरोपीय संघ और रूस के बीच डील हुई. इसके अगले ही दिन यानुकोविच राजधानी से भाग गए.

यूरोपीय परिवार का सदस्य

रूस ने शुरूआत में तो कीव की घटनाओं का विरोध किया क्योंकि वहां ऐसा धड़ा प्रशासन में आने वाला था जो पश्चिम की ओर झुका हुआ है. मॉस्को ने कीव में अपने राजदूत को सलाह के लिए बुलाया. और आरोप लगाया कि पश्चिमी राजनयिक राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं. और विरोध प्रदर्शन करने वालों को रूस ने चरमपंथी करार दिया.

इतना ही नहीं रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने कहा कि पश्चिमी हिस्से में 'राष्ट्रवाद और नव फासीवाद बढ़ रहा है', जिसकी 'निर्णायक रूप से आलोचना' की जानी चाहिए. और कि यूक्रेन पर रूस या पश्चिम में से एक को चुनने का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए. "हम चाहते हैं कि यूक्रेन यूरोपीय परिवार का हिस्सा रहे, शब्द के सभी अर्थों में. लेकिन यूक्रेन पर एक विकल्प चुनने का दबाव डालना खतरनाक और नुकसानदेह है."

मदद

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी कैथरीन एश्टन ने कहा कि यूरोप ने मदद का प्रस्ताव रखा है, हस्तक्षेप का नहीं. और यूक्रेन और रूस के बीच मजबूत संबंधों पर जोर देते हुए उन्हें बनाए रखने के महत्व का संकेत दिया.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ ने मंगलवार को कहा कि यूक्रेन को वह तुरंत ही तकनीकी मदद देगा क्योंकि यूक्रेन के दिवालिया होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है. अभी संसद में नई सरकार पर वोट भी नहीं हुआ है. यूक्रेन के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि उन्हें दो साल में 35 अरब डॉलर की जरूरत होगी.

उधर देश के दक्षिणी हिस्से से प्रदर्शनों की खबरें हैं. रूस के समर्थन वाला ये इलाका कीव में नई सत्ता का विरोध कर रहा है और नई सत्ता को "डाकू" बताया है. क्रिमिया यूक्रेन का ऐसा द्वीप है, जहां रूस की नौसेना का रणनीतिक पोस्ट है. और यहां के अधिकतर लोग पूरी तरह रूस के समर्थक हैं. आशंका है कि इस तरह के इलाके देश में अलगाववादी भावना भड़का सकते हैं.

एएम/एजेए (एएफपी, रॉयटर्स, डीपीए)

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