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दुनिया

यूएन में अमेरिका फर्स्ट पर जोर दिया ट्रंप ने

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना अंतरराष्ट्रीय संकट का मुकाबला सहयोग के जरिये करने के लिए हुई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि 193 सदस्यों को विश्व संस्था को मजबूत करने के लिए अपनी ताकत पर ध्यान देना चाहिए.

 

राष्ट्रपति ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले भाषण में अमेरिकी हितों के अनुरूप विदेश नीति तय करने के इरादे पर जोर दिया है. विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में मैं अमेरिका को हमेशा पहले स्थान पर रखूंगा." उन्होंने साथ ही कहा कि दूसरे देशों को भी ऐसा ही करना चाहिए. "सभी राजनेताओं का कर्तव्य है कि वे अपने नागरिकों की सेवा करें."

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में बार बार राजकीय संप्रभुता के सिद्धांत का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ताकतवर और स्वतंत्र राष्ट्रीय राज्य 193 सदस्यों वाले विश्व संगठन को कामयाबी की ओर ले जायेंगे. संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों को हासिल करना उन देशों पर निर्भर है जो अपनी संप्रभुता और शांति की इच्छा को लागू करते हैं. अमेरिका की भूमिका के बारे में ट्रंप ने कहा, "हम अपनी जीवन शैली हर किसी पर नहीं थोपना चाहते." उन्होंने साथ ही कहा कि अमेरिका दूसरों के लिए मिसाल बनना चाहता है. शांति, सुरक्षा और संप्रभुता दुनिया भर के देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया एक मोड़ पर खड़ी है. "हम यहां भारी उम्मीदों, लेकिन भयानक खतरों के समय में मिल रहे हैं." ट्रंप ने जोखिमों के रूप में अंतरराष्ट्रीय आतंक, आपराधिक नेटवर्क और निरंकुश सरकारों का नाम लिया, जिनके पास जनसंहारक हथियार हैं. उन्होंने कहा, "हम दुनिया को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं, या उसे गहराई में गिरा सकते हैं जहां उसे बचाया नहीं जा सकता है." ट्रंप ने उत्तर कोरिया को अपने परमाणु हथियारों से दुनिया को खतरे में डालना वाला देश बताया और कहा, "परमाणु हथियारों को खत्म करना एक ही चलने योग्य रास्ता है."

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि "अमेरिका बहुत ताकत और धैर्य वाला देश है "लेकिन यदि अमेरिका पर जबरदस्ती की जायेगी तो उसे उत्तर कोरिया को नष्ट करना होगा. उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन की ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने कहा, "रॉकेटमैन आत्मघाती राह पर है."  इसके पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेश ने न्यू यॉर्क में जमा विश्व नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा था कि दुनिया शीत युद्ध के बाद परमाणु हमले के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है.

एमजे/एके (डीपीए)

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