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दुनिया

यूएन महिला संस्था में चुना गया भारत, ईरान नाकाम

भारत को संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था के बोर्ड में चुन लिया गया. अमेरिका और मानवाधिकार संगठनों के कड़े विरोध के बाद ईरान को नहीं मिली सीट. महिलाओं को दुनिया में बराबारी का हक दिलाने के लिए काम करेगी यूएन की नई एजेंसी.

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संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था यूएन की अलग अलग चल रही महिला एजेंसियों का संगठन होगा. खासतौर से महिलाओं को बराबरी का हक दिलाने के लिए इसका गठन इसी साल किया गया है. 41 सदस्यों वाले कार्यकारी बोर्ड में अमेरिका और ब्रिटेन को दान देने वाले देशों के रूप में संस्था में जगह मिली है.

चुनाव के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "भारत उन देशों में हैं जिसने संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं को मजबूत बनाने और उन्हें बराबरी का हक दिलाने के काम को पूरी अहमियत दी है. इसके साथ ही देश निर्माण के काम में महिलाओं की भागीदारी का भारत को खूब अनुभव है. यह अनुभव संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था में काम का साबित होगा." इसके साथ ही पुरी ने ये भी कहा कि भारत को महिलाओं की दशा में सुधार के लिए अभी बहुत काम करना है.

Global Media Forum Teilnehmer Shirin Ebadi

शिरीन एबादी ने सउदी अरब और ईरान का विरोध किया

पुरी ने कहा, "एक तरफ संयुक्त राष्ट्र में भारत का अनुभव काम आएगा तो दूसरी तरफ यहां किए गए कामों का अच्छा संदेश भारत तक पहुंचेगा. भारत का मानवाधिकारों के मामले में अच्छा रिकॉर्ड है."

उधर बोर्ड सदस्य बनने की कोशिश कर रहे ईरान को करारा झटका लगा है और वो नाकाम हो गया जबकि महिलाओं पर जुल्म के मामले में ज्यादा खराब रिकॉर्ड रखने वाले सउदी अरब को बोर्ड में जगह मिल गई है. ईरान पहले एशिया की 10 सीटों में जगह पाने के का हकदार समझा जा रहा था और उसके सामने कोई प्रतिद्वंदी भी नहीं था लेकिन अचानक ईस्ट तिमोर इस दौड़ में शामिल हो गया. इससे मुकाबला सख्त हो गया और ईरान हार गया. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद के 54 देशों की वोटिंग में ईस्ट तिमोर को 36 वोट मिले जबकि ईरान को केवल 19.

इससे पहले 2003 का नोबेल पुरस्कार पाने वाली शिरीन एबादी ने संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था में सउदी अरब और ईरान के शामिल होने को एक मजाक कहा था. एबादी भी ये मानती हैं कि सउदी अरब में महिलाओं की स्थिति ईरान से ज्यादा खराब है. संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था के दूसरे विवादित सदस्यों में लीबिया और डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो को भी गिना जा रहा है. पिछले समय में वहां से बड़ी संख्या में महिलाओं के बलात्कार की खबर आई है. इन दोनों देशों का चुनाव भी सउदी अरब की तरह ही विरोध में किसी के नहीं होने के कारण हुआ है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः महेश झा

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