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दुनिया

यूएन के एजेंडे में बना रहेगा कश्मीर विवाद

कश्मीर विवाद को भले ही सुरक्षा परिषद की सालाना रिपोर्ट में जगह न दी गई हो लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में शामिल रहेगा. रिपोर्ट में जिक्र न आने के लिए ब्रिटेन ने सफाई दी है.

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यूएन की रिपोर्ट में कश्मीर का जिक्र न होने पर पाकिस्तान खफा हो गया और उसने अपना तीखा विरोध दर्ज कराया जबकि भारत ने इस बात का स्वागत किया और कहा कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है. लेकिन अब संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले में सफाई पेश की है. संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटिश मिशन के प्रवक्ता हैरियट क्रॉस ने साफ किया कि क्यों ब्रिटेन के प्रमुख दूत मार्क लायल ग्रांट ने कश्मीर का जिक्र पिछले हफ्ते आई अपनी रिपोर्ट में नहीं किया. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में उन्हीं मुद्दों का जिक्र किया गया जो अगस्त 2009 से जुलाई 2010 के दौरान सुरक्षा परिषद की चर्चा में शामिल किए गए.

क्रॉस ने कहा, "चूंकि इस समयावधि में कश्मीर पर चर्चा नहीं हुई तो इसका रिपोर्ट में भी जिक्र नहीं हुआ." पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को बार बार संयुक्त राष्ट्र में उठाता है. उसकी मांग है कि यूएन मसले में दखल दे. हालांकि भारत इसे अपना आंतरिक मामला बताता है. नवंबर के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास है, इसलिए महासभा में परिषद की सालाना रिपोर्ट शुक्रवार को ग्रांट ने पेश की. ग्रांट के बयान के बाद पाकिस्तान ने इस पर अपना विरोध जताया.

यूएन में पाकिस्तान के कार्यवाहक दूत अमजद हुसैन बी सियाल ने कहा, "हम मानते हैं कि यह असावधानी की वजह से हुई चूक है क्योंकि जम्मू कश्मीर विवाद तो सुरक्षा परिषद के एजेंडे में शामिल सबसे पुराने मुद्दों में से है."

क्रॉस ने यह भी साफ किया कि इस मुद्दे पर ब्रिटेन का रुख यही है कि इस मुद्दे का ऐसा हल खोजा जाए जो कश्मीरी लोगों की इच्छा के मुताबिक हो और जिस पर कायम रहा जा सके.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एन रंजन

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