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मनोरंजन

युवाओं में योग का बढ़ता क्रेज़

ब्यूटीफुल और ब्लिसफुल दिखना चाहते हैं तो योग करें. ये कहना योग गुरू रामदेव का नहीं है, बल्कि करीना कपूर और बिपाशा बसु का है. आज की अभिनेत्रियां योग की भाषा बोलें तो युवा कहां पीछे रहेंगे.

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बीत गए वो दिन जब कहा जाता था कि योग सिर्फ बुज़ुर्गों के लिए होता है. जी हां अगर बाबा रामदेव योग सिख़ाएंगे तो बुज़ुर्गों के लिए लेकिन अगर शिल्पा शेट्टी या बिपाशा बसु योग की दुनिया में कदम रखेंगी तो यंगस्टर्स पीछे कहां रहेंगे. 24 साल की सलोनी कहती हैं कि, "सिर्फ भारत के ही नहीं, अगर बाहर की भी अभिनेत्रियां योग की तरफ बढेंगी तो फिर हम पीछे क्यों रहें? "

Indischer Yoga Guru Baba Ramdev

बाबा रामदेव

हमेशा से ही नामचीन हस्तियां यंगस्टर्स के लिए रोल मॉडल बनती आई हैं. सलोनी कहती हैं, "योग की दुनिया में सिर्फ भारत के मशहूर लोग ही नहीं मैडोना, एन्जलीना जोली और यहां तक की ब्रिटनी स्पीयर्स जैसे नाम तक शामिल हो चुके हैं." पिछले कुछ सालों तक योग की पहुंच यंगस्टर्स तक ना के बराबर थी. लेकिन आज की युवा पीढ़ी जिम और एरोबिक्स से ज़्यादा योग की तरफ अपना ध्यान लगा रही है.

योग प्रशिक्षक कौशल का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी पहले की अपेक्षा ज़्यादा समझदार हो गई है और बड़े शौक से योग को अपना रही है. वह कहते हैं, "करीबन 80 प्रतिशत युवा आज योग का अभ्यास कर रहे हैं और उसमें भी विशेष रूप से 25 से 30 साल के युवा शामिल हैं."

Frauen während Yoga im Iran

ईरान मे योग करती महिलाएं

लेकिन साधना और ध्यान की इस कठिन प्रक्रिया की ओर युवा पीढ़ी क्यों खिचती जा रही है? 27 साल की हिमानी पिछले कुछ सालों से योग कर रही हैं, वो कहती हैं- "योग, फिट और सेहतमंद रहने में हमारी बहुत मदद करता है. मेडीटेशन और प्राणायाम हमें शांति और सुकून देता है. जो आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में बहुत ज़रूरी है."

लेकिन योग का ये नया रूप सिर्फ भारत में ही नहीं, विश्व भर में नज़र आ रहा है. अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान तक योग अपनी पहचान बना रहा है. आज अमेरिका के सबसे महंगे व्यवसायिक केंन्द्र मैनहट्टन एस्टेट और एम्पायर एस्टेट जैसे इलाक़ों तक में योग स्टूडियोस खोले जा रहे हैं जिनको चलाने वाली आज की युवा पीढ़ी ही है. डीवीडी, किताबें, टीवी चैनल्स , वेबसाइट्स और कुछ योग संस्थाओं के ज़रिए युवा अपनी ज़िन्दगी में योग के ज़रिए सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं.

रिपोर्ट: श्रेया कथूरिया

संपादन: महेश झा

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