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दुनिया

युवाओं को इंटरनेट से लुभाता यूरोप

भारत में चुनाव का मौसम खत्म हुआ है, तो यूरोप में शुरू हो गया है. अगले हफ्ते यूरोपीय संसद के चुनाव हैं. युवाओं को वीडियो गेम और एनीमेशन के जरिए लुभाने की कोशिश की जा रही है.

अक्सर युवाओं की राजनीति में काफी कम रुचि होती है. राजनीति पर लेख पढ़ने की जगह वे सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर करना और ऑनलाइन गेम्स खेलना ज्यादा पसंद करते हैं. इस समस्या को समझते हुए यूरोपीय संघ ने ऑनलाइन के माध्यम से ही युवाओं को लुभाने की कोशिश की. लेकिन अब तक यह कोशिश रंग लाती नहीं दिख रही.

यूरोपीय संसद 2005 से ही कई तरह के ऑनलाइन प्रोजेक्ट स्पॉन्सर कर रही है. मकसद है युवाओं को समझाना कि ब्रसेल्स और स्ट्रासबुर्ग में किस तरह संसद का काम होता है. दरअसल बजट को चार हिस्सों में बांटा जाता है, टीवी, रेडियो, इंटरनेट और इवेंट. 2010 से 2012 के बीच यूरोपीय संसद ने 44 अलग अलग इंटरनेट प्रोजेक्ट पर 50 लाख यूरो खर्च किए हैं. इसमें ईयू के काम को समझाती कुछ वेबसाइटें हैं और कई गेम भी हैं. मिसाल के तौर पर एक गेम में एक नीला एलियन धरती पर आता है ताकि ईयू को समझ सके. इसके अलावा कई एनीमेशन भी हैं.

ये प्रोजेक्ट जितने भी दिलचस्प हों, लेकिन युवाओं को अपनी ओर खींचने में सफल नहीं रह पाए हैं. 44 में से बीस प्रोजेक्ट के ही आंकड़े उपलब्ध हैं. इनमें से नौ तो ऐसे हैं जिन्हें पांच साल में केवल 5,000 लोगों ने ही देखा है. पांच ऐसे भी हैं जो पांच से करीब पचास हजार लोगों तक पहुंचने में कामयाब हो पाए हैं. और केवल छह ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिनकी पहुंच 50,000 से ज्यादा रही. इन प्रोजेक्ट पर जितना खर्च किया गया है, उसके हिसाब से ये आंकड़े बेहद निराशाजनक हैं.

पोलेंड में सरकारी प्रेस एजेंसी के साथ मिल कर एक ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया, जिस पर 1,35,000 यूरो का खर्च आया. एजेंसी के अनुसार अब तक केवल 329 लोगों ने ही इस ट्रेनिंग कोर्स में हिस्सा लिया है. इन प्रोजेक्ट के लिए अधिकतर प्राइवेट कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता है. ज्यादातर ये स्टार्ट अप कंपनियां होती हैं जो नए नए तरह के ऑनलाइन आइडिया ले कर आती हैं. लेकिन वेबसाइटों पर काम तभी तक चलता है, जब तक संसद से पैसा मिलता रहे. ग्रांट खत्म होने के बाद प्रोजेक्ट भी ठप पड़ जाते हैं.

पैसे की बर्बादी

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ईयू पैसे की बर्बादी कर रहा है. कई सांसदों का भी मानना है कि इस फिजूलखर्ची पर रोक लगनी चाहिए. नीदरलैंड्स की सांसद मारियाने थीमे का कहना है कि ईयू की एक बहुत बड़ी समस्या यह है कि वह अपना ही प्रचार करना चाहता है. उन्हें इस बात से ही दिक्कत है कि "संसद के पास अपना प्रचार करने के लिए बजट है." थीमे के विचार में इस तरह के मीडिया प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च करना बंद होना चाहिए.

इसी तरह जर्मनी की डोरिस पाक का कहना है कि यूरोपीय संसद करदाताओं के पैसे को बर्बाद कर रही है. वह कहती हैं, "मुझे लगता है कि पैसा तो बहुत है और बहुत सारा पैसा गलत दिशा में जा रहा है." साथ ही उनका मानना है कि जिन लोगों को ध्यान में रख कर वेबपोर्टल बनाए जा रहे हैं, वे तो उन पर आ ही नहीं रहे हैं, "हम केवल उन्हीं लोगों तक पहुंच पा रहे हैं, जो चाहते हैं कि हम उन तक पहुंचे."

वहीं कई सांसदों का मानना है कि आंकड़े सफलता तय नहीं कर सकते हैं. लेकिन 25 मई को जब यूरोपीय संसद के चुनाव होंगे, तब शायद यह साफ हो जाएगा कि इस खर्च का कोई फायदा हुआ भी है या नहीं. पिछले सालों में मतदाताओं की संख्या गिर रही है. अगर वीडियो गेम का असर वाकई में दिखा तो क्या पता कि नीले एलियन लोगों को मतदान केंद्रों तक खींच कर ले ही आएं.

रिपोर्ट: पेटर ट्रेफर/आईबी

संपादन: महेश झा

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