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खेल

युर्गेन क्लॉप को गुस्सा क्यों आता है

हमेशा सुर्खियों में रहने वाले बोरुसिया डॉर्टमुंड के कोच युर्गेन क्लॉप पर एक बार फिर 10,000 यूरो का जुर्माना लगा है. क्लॉप का कहना है कि उन्होंने कोई गलती नहीं की.

सुनहरे बाल, काले फ्रेम का चश्मा और दिल जीत लेने वाली मुस्कराहट. विज्ञापनों में छाए रहने वाले युर्गेन क्लॉप की एक तरफ तो ऐसी 'कूल इमेज' है तो दूसरी ओर उन्हें अपने गुस्से के लिए भी जाना जाता है. टीवी कैमरों ने कई बार उन्हें अपनी टीम के खिलाड़ियों पर चिल्लाते हुए रिकॉर्ड किया है. कहा जाता है कि कैमरा को उनसे प्यार है, इसलिए खेल के दौरान किसी ना किसी तरह कैमरा बार बार उन पर आ ही जाता है.

इस बार भी ऐसा ही हुआ. क्लॉप साइडलाइन के पास खड़े थे. बोरुसिया डॉर्टमुंड और बोरुसिया मोएंशनग्लाडबाख का मैच खत्म ही होने जा रहा था. रेफरी ने सीटी बजाई और दर्शक इस सोच में पड़ गए कि खेल पर ध्यान दें या क्लॉप पर. इसके बाद क्लॉप को स्टैंड से बाहर निकल जाने को कहा गया और कंधे उचकाते हुए वे गुस्से में वहां से निकल गए. मैच रिपोर्ट में रेफरी ने कहा है, "ऐसा एक से ज्यादा बार हुआ कि मिस्टर क्लॉप का रवैया बुरा रहा." क्लॉप के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ. इस से पहले भी वह सात बार स्टैंड से निकाले जा चुके हैं और उन पर कई बार जुर्माना लग चुका है.

क्लॉप की सफाई

मैच के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब क्लॉप से पूछा गया कि हुआ क्या था तो उन्होंने कहा, "मुझे ठीक तरह तो नहीं याद कि मैंने क्या कहा था. मैं वहां खड़ा था और जब मैंने देखा कि रेफरी ने सीटी नहीं बजाई तो मैं अचानक से फोर्थ रेफरी की ओर घूम गया. इस से ज्यादा मैंने कुछ भी नहीं किया." खुद को मासूम बताते हुए उन्होंने कहा, "मेरा चेहरा ही दुनिया भर में इतना जाना माना है कि मैं क्या करूं."

क्लॉप ने कहा कि उनकी जगह कोई और भी होता तो ऐसी ही प्रतिक्रया देता, "93वां मिनट चल रहा था. वहां करीब 80,000 दर्शक थे और सब भावुक थे. तो क्या कोच को भावुक होने का हक नहीं है? और अगर किसी एक इंसान को यह बात समझ नहीं आती तो मैं कुछ नहीं कर सकता." क्लॉप ने जुर्माने को नाजायज बताते हुए कहा, "मुझे इस से पहले भी कई बार जुर्माना लगा है, सजा मिली है लेकिन इस बार जो हुआ वह गलत है. मेरी जगह वहां आप में से कोई भी हो सकता था और तब शायद आपको वहां से ना भेजा गया होता. यह अनुचित था."

अब तक 58,000 यूरो जुर्माना

क्लॉप को बार बार अपने गुस्सैल मिजाज का भुगतान जुर्माने के रूप में करते रहना पड़ा है. 2004 में माइंस के कोच के रूप में उन्होंने रेफरी टीम से दुर्व्यवहार किया. उस समय उन पर ढ़ाई हजार यूरो का जुर्माना लगा. इसी तरह तीन साल बाद माइंस के ही कोच के रूप में वे रेफरी पर चिल्ला पड़े, "यू इडियट". इसके बदले में उन्हें 12,500 यूरो चुकाने पड़े. इसके बाद 2008 में तो ना केवल मैदान में उनकी रेफरी से झड़प हुई, बल्कि बाद में रेफरी के केबिन में जा कर भी उन्होंने झगड़ा कर लिया. उस वक्त उन्हें बारह हजार यूरो देने पड़े.

फिर 2010 में बार बार कोच एरिया से निकल कर स्टैंड तक आ जाने के कारण उन पर पांच हजार यूरो का जुर्माना लगा. दस ही महीने बाद हैम्बर्ग के खिलाफ मैच में तो उन्होंने हद ही कर दी. गुस्से में आ कर उन्होंने रेफरी की टोपी पर हाथ मारा और वह रेफरी के असिस्टेंट के चहरे पर जा लगी. इसके लिए उन्हें एक बार फिर दस हजार यूरो देने पड़े. हालांकि इस बार उन्होंने माना कि गलती उन्हीं की थी. मैच के बाद उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, "यह ठीक नहीं था."

माफियों का सिलसिला

लेकिन उनके जुर्मानों का किस्सा अभी खत्म नहीं हुआ. दो साल बाद फ्रैंकफर्ट में उन्हें फिर छह हजार यूरो देने पड़े. इस बार भी उन्होंने शर्मिंदगी दिखाई और कहा, "जो हुआ, अच्छा नहीं हुआ." इसी साल सितंबर में चैंपियंस लीग के मैच में क्लॉप को फोर्थ रेफरी पर चीखते हुए देखा गया. इस बार उन्होंने कहा, "मैंने अपना ही मजाक बना लिया. इस बार मैंने हद कर दी और यह पूरी तरह बेहूदगी थी."

हालांकि इस बार उन्होंने माफी मांगने से मना कर दिया है और उन्हें डॉर्टमुंड के अध्यक्ष हंस योआखिम वात्स्के का भी सहयोग हासिल है. अपने बयान में वात्स्के ने कहा, "युर्गेन ने किसी का अपमान नहीं किया. जो उन्होंने किया है, वही बाकी के 17 कोच भी करते हैं." लेकिन इस सहयोग के बावजूद उन्हें दस हजार यूरो तो देने ही पड़ रहे हैं. देखना यह है कि आने वाले समय में अभी उन्हें अपने गुस्से के चलते और कितना खर्च उठाना होगा.

रिपोर्ट: रिचार्ड कॉनर/ईशा भाटिया

संपादन: महेश झा

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