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दुनिया

युद्ध में सेक्स गुलामी घोर अपराध

एशिया दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि दूसरे विश्व युद्ध के समय सेक्स गुलामी मानवाधिकारों का "भयानक" उल्लंघन था. पीड़ितों की सुनवाई होनी चाहिए.

पूर्वोत्तर एशिया के सबसे विवादास्पद मुद्दे को छूते हुए बराक ओबामा ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के पहले और बाद में जापानी सेना द्वारा की गई गलतियों का हिसाब किताब होना चाहिए. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान और उसके पहले हजारों महिलाओं को जबरन देह व्यापार में धकेल दिया गया. उस दौर में चकलाघर जापानी सैनिकों के मनोरंजन के लिए बनाए जाते थे.

ओबामा ने कहा, "मानवाधिकार का यह एक भयानक और अत्यंत बुरा उल्लंघन था. युद्ध के बीच में जिस तरह से महिलाओं के साथ अत्याचार किए गए वह चौंकाने वाले थे. उनको सुने जाने की जरूरत है. वे इज्जत पाने योग्य हैं. और उस दौरान क्या हुआ उसकी सटीक और स्पष्ट व्याख्या होनी चाहिए. मुझे लगता है जापानी प्रधानमंत्री शिन्जो आबे इसको मान्यता देंगे और निश्चित रूप से जापानी जनता अतीत को समझेंगी और उसे ईमानदार और निष्पक्ष रूप से मान्यता देगी. "

जापानी सरकार की तरफ से औपचारिक क्षमा याचना के बावजूद दक्षिण कोरिया और अन्य देश टोक्यो पर आरोप लगाते आए हैं कि उसने प्रायश्चित्त करने के लिए पर्याप्त नहीं किया. 1910 से 1944 के बीच कोरियाई प्रायद्वीप जापान के कब्जे में था. इस दौरान कोरिया, चीन, मलेशिया और फिलीपींस की महिलाओं को देह व्यापार में ढकेला गया और उनसे जबरन यौन संबंध बनाए गए.

हालांकि कई जापानी देश की गलती मानते हैं लेकिन कुछ वरिष्ठ नेता, जैसे आबे, दूसरी तरफ खड़े नजर आते हैं. आबे सुझाव दे चुके हैं कि इस मुद्दे को कुछ ज्यादा बढ़ाया चढ़ाया जाता रहा है. ओबामा ने कहा है कि दोनों देशों को रास्ता ढूंढना होगा और आगे बढ़ना होगा.

ओबामा ने कहा, "यह जापान और कोरिया, दोनों की जनता के हित में है कि वे आगे की तरफ देखें और साथ ही साथ पीछे की तरफ भी ताकि पुराने दर्द और दिल के गम खत्म किए जा सकें."

बढ़ते राष्ट्रवाद के कारण दोनों देशों में हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है. दक्षिण कोरिया के मानवाधिकार संगठन अमेरिका में 'कंफर्ट विमेन' की मूर्ति लगाने की मांग कर रहे हैं. सेक्स और देह व्यापार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इन महिलाओं को 'कंफर्ट विमेन' कहा जाता था. वॉशिंगटन के सामने निराशा वाली स्थिति है क्योंकि उसके दो मुख्य सहयोगी इस मुद्दे को सुलझा नहीं पा रहे हैं.

एए/एएम (एएफपी)

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