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दुनिया

यासिर अराफात की कब्र खोदी गई

फलीस्तीनी मुक्ति के महानायक यासिर अराफात के अवशेष को मृत्यु के लगभग आठ साल बाद कब्र से खोद कर निकाल लिया गया है. उनकी बीवी का आरोप है कि अराफात को जहर देकर मारा गया, जिसकी जांच होगी.

अराफात की मौत किस वजह से हुई, इसकी गुत्थी कभी नहीं सुलझ पाई. जांचकर्ता तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि 2004 में अराफात की मौत क्यों हुई थी. रामाल्लाह में अराफात की कब्र से उनके अवशेष निकाल लिए गए हैं. इस दौरान मीडिया को दूर रखा गया. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक केवल एक फलीस्तीनी डॉक्टर को अवशेष छूने की इजाजत दी गई लेकिन पूरी प्रक्रिया स्विट्जरलैंड, फ्रांसीसी और रूसी विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुई. अवशेषों में से जांच के लिए केवल कुछ नमूने निकाले गए और कब्र को दोबारा सील कर दिया गया. इन अवशेषों में पोलोनियम धातु की जांच की जाएगी.

इस साल अगस्त में अराफत की पत्नी सुहा ने फ्रांसीसी सरकार से जांच की मांग की. रविवार को फ्रांस के अधिकारी इस सिलसिले में रामाल्लाह पहुंचे. 2004 में अराफत 75 साल के थे और पैरिस के पास पर्सी मिलिट्री अस्पताल में उनकी अचानक मौत हो गई. डॉक्टर अब भी नहीं बता पाए हैं कि उनकी मौत किस वजह से हुई और उनके शव की जांच भी नहीं की गई.

फलीस्तीन में कई लोगों का मानना है कि उनकी मौत के पीछे इस्राएल का हाथ है और वहीं से अराफत को जहर पिलाने की साजिश रची गई. इस साल जुलाई में टीवी चैनल अल जजीरा ने एक कार्यक्रम का प्रसारण किया. इसमें दावा किया गया कि अल जजीरा और स्विट्जरलैंड की एक प्रयोगशाला को अराफात के कपड़ों में रेडियोधर्मी पोलोनियम के सबूत मिले. पोलोनियम के बारे में कहा जाता है कि यह रेडियोधर्मी पदार्थ है और सायनाइड से भी कई गुना ज्यादा जहरीला है. 2006 में रूस के पूर्व जासूस और वहां की सरकार के आलोचक आलेक्सांडर लितविनेन्को की हत्या भी लंदन में रेडियोधर्मी पोलोनियम 210 से की गई थी. लंदन में वह एक रेस्तरां में चाय पी रहे थे जब उनकी चाय में किसी ने पोलोनियम मिला दिया.

हालांकि लौसैन में इंस्टीट्यूट ऑफ रेडियोलॉजी के डार्सी क्रिस्टेन ने कहा है कि अराफात पर पोलोनियम के जहर का असर नहीं दिखाई दे रहा था और पोलोनियम से उनकी हत्या का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. क्रिस्टन कहते हैं कि लितविनेन्को के सारे बाल पोलोनियम खाने के बाद गिर गए जबकि अराफात के चेहरे और सर के बाल बिलकुल ठीक थे. कुछ और वैज्ञानिकों का कहना है कि रेडियोधर्मी पोलोनियम का शरीर पर असर साफ साफ दिखता है और अगर अराफात के मामले में ऐसा होता तो यह दिख भी जाते. स्विट्जरलैंड में अकादमी ऑफ मेडिसीन के रोलां मास का कहना है, "पोलोनियम जब शरीर में जाता है तो शरीर को विकिरण का सामना करना पड़ता है. खून में फिर सफेद कोशिकाएं बहुत जल्दी खत्म होने लगती हैं. अराफत के शरीर में ऐसा नहीं हुआ."

बहरहाल, जांच शुरू हो चुकी है. जहां तक अराफात की हत्या में इस्राएल की साजिश की बात है, जांचकर्ताओं का कहना है कि अगर अराफात के शरीर में पोलोनियम पाया भी जाता है और अगर तय हो जाता है कि उनकी मौत इससे हुई, तो भी यह बताना मुश्किल होगा कि पोलोनियम किसी व्यक्ति ने डाला था या वह प्राकृतिक रूप से उनके खाने पीने में आ गया था.

एमजी/एजेए (डीपीए, एएफपी)

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