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दुनिया

यहां महिलाएं काम नहीं करती

15 साल पहले पेशावर की सलीमा बीबी ने मेडिकल की पढ़ाई पूरी की लेकिन आज तक वह पेशेवर तरीके से कभी प्रैक्टिस नहीं कर पाई. यहां महिलाओं को नौकरी के लिए बढ़ावा नहीं मिलता.

उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के शहर पेशावर की रहने वाली 40 वर्षीय सलीमा बीबी कहती हैं, "मैं सरकारी नौकरी चाहती थी, लेकिन मेरा परिवार मेरी शादी कराना चाहता था." अब सलीमा गृहिणी हैं, जिनके सास ससुर कामकाजी महिलाओं के विचार के सख्त खिलाफ हैं. सलीमा कहती हैं, "मुझे पता है कि प्रांत में महिला डॉक्टरों की कमी है. चिकित्सा से जुड़े पेशे में वेतन और अन्य सुविधाएं काफी आकर्षक हैं. लेकिन सामाजिक वर्जनाएं महिलाओं की नौकरी खोजने की इच्छा के आड़े आती हैं."

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक पाकिस्तान में श्रम शक्ति की भागीदारी में लिंग असमानता गंभीर है. 2009 और 2012 के बीच महिला रोजगार दर के मुकाबले पुरुष रोजगार दर 80 फीसदी पहुंच गई है. देश में महिला रोजगार दर 20 फीसदी से भी कम है. देश के उत्तरी कबायली इलाके में हालात तो और भी खराब हैं. धार्मिक रीति रिवाजों के कारण महिलाएं घरों में बंद हो गई हैं. वे पत्नी, मां और घर बार संभालने वाली महिलाओं की पारंपरिक भूमिका से बाहर नहीं निकल पाईं हैं.

सलीमा बीबी जब 20 साल की थी तब उन्होंने उन चीजों का सामना किया जो ज्यादातर महिलाओं को अपने करियर बनाने के सपने को पूरा करने में करना पड़ता है, अर्थव्यवस्था में बराबर की भागीदारी के लिए अंतहीन बाधा का सामना करना. पेशावर में स्थित सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब्दुल बासित उदाहरण देते हुए बताते हैं कि 2.2 करोड़ आबादी वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्वास्थ्य क्षेत्र में सिर्फ 40 हजार महिलाओं को रोजगार मिला हुआ, जबकि सात लाख पुरूषों की बड़ी आबादी इस सेक्टर में काम कर रही है. वे कहते हैं, "स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिला कर्मचारियों की कमी महिला आबादी के लिए हानिकारक है. और यह पुरुष प्रभुत्व का नतीजा है और ऐसी सोच से बने माहौल का नतीजा जिसके मुताबिक महिलाओं को बाहर जाकर काम करने के बजाय घर संभालना चाहिए."

हालांकि तब भी देश के डॉक्टरों में महिला डॉक्टरों की संख्या 20 फीसदी है. सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सैकड़ों महिला छात्रों ने दाखिला लिया हुआ है. लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में 6000 पुरुष डॉक्टरों के मुकाबले सिर्फ 600 महिला डॉक्टर ही हैं. जानकारों का भी कहना है कि व्हाइट कॉलर नौकरी में महिला श्रमिकों का अनुपात बहुत सीमित है, यहां तक ​​कि शिक्षित महिलाओं को सार्वजनिक सेवा में प्रवेश करने से हतोत्साहित किया जाता है.

पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2012-13 के लिए अनौपचारिक क्षेत्र में महिला कर्मचारियों की भीड़ है. घरेलू कर्मचारी और अन्य कम वेतन वाली नौकरियां, रोजमर्रा का काम जैसे बावर्ची, सफाई कर्मचारी जैसे पेशे शामिल हैं इसके विपरीत क्लेरिकल और प्रशासनिक पदों पर महिलाओं की भागीदारी दो प्रतिशत से भी कम है. शोध से संकेत मिलता है कामकाजी महिलाओं में सिर्फ 19 फीसदी के पास सरकारी क्षेत्र में नौकरियां थीं, हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा में 2010-11 में करीब दो लाख महिलाएं सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रही थीं.

एए/एमजे (आईपीएस)

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