म्यांमार में सू ची को भारी बहुमत | दुनिया | DW | 13.11.2015
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दुनिया

म्यांमार में सू ची को भारी बहुमत

म्यांमार में ऑन्ग सान सू ची की विपक्षी पार्टी एनएलडी ने संसदीय चुनावों में बहुमत जीत लिया है. ऐतिहासिक चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद अब देश की एकता 15 साल तक नजरबंद रही लोकतांत्रिक नेता की मुख्य जिम्मेदारी है.

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लोकतंत्र की लंबी लड़ाई

सू ची के लिए 13 नवंबर का दिन जिंदगी का महत्वपूर्ण दिन साबित हुआ है. पांच साल पहले 2010 में 13 नवंबर को ही उन्हें नजरबंदी से रिहा किया गया था. अब 13 नवंबर को औपचारिक नतीजों की घोषणा में प्रचंड बहुमत पाकर उनकी पार्टी न सिर्फ नई सरकार बनाएगी बल्कि वे यह तय कर पाने की भी हालत में होंगी कि अगला राष्ट्रपति कौन होगा. 8 नवंबर को हुए संसदीय चुनाव के कुछ अहम आंकड़ों पर नजर डालें. 664 सीटों वाली दो सदनों की संसद में सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रैसी को 364 सीटें मिल चुकी हैं. निचले सदन की 440 सीटों में सू ची की पार्टी को 238 सीटें मिल चुकी हैं. 110 सीटें सेना के लिए आरक्षित है. 224 सीटों वाले ऊपरी सदन में एनएलडी को 126 सीटें मिली हैं. रोहिंग्या समुदाय के 5 लाख लोगों को मतदान का अधिकार नहीं था. उन्हें बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी माना जाता है.

संसदीय चुनावों में 329 सीटों को मैजिक नंबर कहा जा रहा था जिसके साथ सू ची की लोकतांत्रिक पार्टी को सामान्य बहुमत मिल जाता. अब तक सत्तारूढ़ सेना समर्थित यूएसडीपी पार्टी ने 40 सीटें जीती हैं. यूं तो संसद में एक चौथाई सीटें सेना के प्रतिनिधियों के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन एनएलडी की जीत के साथ म्यांमार में उसका अप्रत्यक्ष शासन भी समाप्त हो जाएगा. सेना समर्थित निर्वाचित सरकार को 2011 में शासन सौंपने तक 49 साल तक म्यांमार में सेना सीधे सत्ता में रही है. नए संविधान में संसद की 25 प्रतिशत सीटें रिजर्व होने के कारण सेना का प्रभाव बना रहेगा.

इस भारी विजय के बाद एनएलडी अपने पसंदीदा उम्मीदवार को राष्ट्रपति चुनने की हालत में होगी. देश के वर्तमान राष्ट्रपति थेन सेन सेना के जनरल हैं और सेना समर्थित यूएसडीपी पार्टी के हैं. सू ची को संवैधानिक प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है, लेकिन उन्होंने 25 साल बाद हुए स्वतंत्र चुनाव में जीत के बाद कहा है कि वे राष्ट्रपति के ऊपर से शासन चलाएंगी. अब के सत्ता के हस्तांतरण पर बातचीत के लिए पुरानी सरकार के महत्वपूर्ण अधिकारियों से मिलेंगी.

एनएलडी की जीत पक्की हो जाने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति थेन सेन, सेना प्रमुख मिन ऑन्ह लेंग और संसद प्रमुख श्वे मान से मुलाकात के लिए चिट्ठी लिखी है. तीनों नेताओं ने सू ची को की पार्टी को उसकी जीत पर बधाई दी थी और मुलाकात की तैयारी जताई थी. सू ची के नजदीक समझे जाने वाले श्वे मान ने एनएलडी की जीत के बाद कहा कि वे भी "विजेता हैं क्योंकि यह लोगों की जीत है, भले ही वे अपनी सीट हार गए हों." श्वे मान को राष्ट्रपति पद के लिए गंभीर उम्मीदवार माना जा रहा है, हालांकि अगला चुनाव थेन सेन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मार्च में होगा.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सू ची को उनकी पार्टी की भारी जीत के लिए बधाई दी है और भारत आने का न्यौता दिया है. सू ची के लिए पिछले दशक व्यक्तिगत पीड़ा के भी रहे हैं. पिछले 22 सालों में वे 15 साल नजरबंद रही हैं. उनकी पार्टी ने 1990 में पिछला स्वतंत्र चुनाव भी जीता था लेकिन सेना ने उसे मानने से इंकार कर दिया था.

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