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दुनिया

म्यांमार में आज 20 साल बाद चुनाव

म्यांमार में 1990 के बाद पहली बार रविवार को चुनाव हो रहे हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री ने चुनावों का खंडन करते हुए कहा कि देश में मानवाधिकारों का खुलासा किया जाना चाहिए.

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लगभग तीन करोड़ लोगों को चुनाव में हिस्सा लेने और वोट डालने के लिए बुलावा भेजा गया है. हालांकि इस साल के चुनावों से देश में बदलाव आने की संभावना कम लग रही है. वर्तमान राष्ट्र प्रमुख थान श्वे ने कहा है कि चुनाव से 'अनुशासित लोकतंत्र' को लागू किया जा सकेगा.

चुनाव में कुल 37 पार्टियां शामिल हो रही हैं. लेकिन विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित ऑंग सान सू ची को पहले ही चुनावों में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया

Flash-Galerie Birma

बदलाव की उम्मीद नहीं

| गया था. उनकी पार्टी नैशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी, एनपीडी ने चुनाव का बहिष्कार किया है. उन्होंने अपने समर्थकों से भी चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की है.

उधर अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी चुनावों को धांधली बताते हुए कहा कि म्यांमार में सेना शासन के दौरान मानवाधिकार हनन की घटनाओं का खुलासा करना होगा. ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रहीं क्लिंटन ने कहा, "यह दिल तोड़ने वाली बात है क्योंकि म्यांमार के लोग इससे कहीं ज्यादा अच्छी स्थिति के लायक हैं. हमें उम्मीद है कि इन चुनावों से कोई ऐसे नेता उभरें जिन्हें पता हो कि म्यांमार को अलग रास्ता अपनाना चाहिए. वह इसी रास्ते पर नहीं चल सकता.

Aung San Suu Kyi

आंग सान सू ची

उसे अपने लोगों के सामर्थ्य को पहचानना चाहिए." उन्होंने कहा कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया मिल कर एक जांच करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि म्यांमार के उन नेताओं को सजा दी जाए जिन्होंने मानवाधिकार के हनन और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार को बढ़ावा दिया.

माना जा रहा है म्यांमार में सेना शासन की पार्टी यूनियन सॉलिडैरिटी और डिवेलपमेंट पार्टी यूएसडीपी चुनाव में विजयी होगी. थाइलैंड में म्यांमार विशेषज्ञ ऑंग नांइग ऊ का कहना है कि लोग इस पार्टी से नफरत करते हैं लेकिन लोगों को पता है कि यही जीतेंगे. संसद में सेना के लिए एक चौथाई सीटें आरक्षित हैं. दो विपक्षी पार्टियों ने यूएसडीपी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने चुनाव से पहले ही लोगों से मतपत्र भरने और उन्हें हड़पने की कोशिश की. डेमोक्रैटिक पार्टी के प्रमुख थू वाई ने कहा कि वह इस तरह की घटनाओं से चिंतित हैं और उन्होंने इस सिलसिले में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है.

खुंता ने देश में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को आने से मना कर दिया है. स्थानीय पत्रकारों पर भी कड़े नियंत्रण लागू किए गए हैं. कई चुनाव क्षेत्रों में यूएसडीपी को नैशनल यूनिटी पार्टी एनयूपी से खतरा हो सकता है. हालांकि एनयूपी भी सेना की करीबी मानी जाती है. प्रमुख थान श्वे ने भी पहले एलान किया था कि वह सैन्य प्रमुख के पद से हटेंगे. थान श्वे चुनावों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वे देश की प्रमुखता पर किसी न किसी तरह अपनी प्रभाव कायम रखेंगे.

रिपोर्टः एजेंसियां/एमजी

संपादनः वी कुमार

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