1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ताना बाना

म्यांमार को करोड़ों डॉलर की मदद देगा भारत

बंगाल की खाड़ी में चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए भारत ने म्यांमार को कर्ज के रूप में करोड़ों डॉलर की मदद देने का ऐलान किया है. म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख जनरल थान श्वे पांच दिन की यात्रा पर भारत में हैं.

default

भारत के दौरे पर थान श्वे

अधिकारियों के मुताबिक जनरल थान श्वे ने मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई भारतीय नेताओं से मुलाकात की. उनकी इस यात्रा में कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. इनमें से एक म्यांमार से लगने वाली भारत की 1,650 किलोमीटर लंबी सीमा पर उस पार से होने वाली हथियारों की तस्करी रोकने का समझौता भी शामिल है.

भारत के एक्सिम बैंक ने म्यांमार को 6 करोड़ डॉलर की मदद देने का एलान किया है जिसे वहां रेल परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा. भारत तेल आयात करने वाले बड़े देशों में शामिल है. ऐसे में वह म्यांमार के साथ गैस के क्षेत्र में सहयोग चाहता है और इसके लिए वहां एक अरब डॉलर का निवेश भी कर सकता है.

भारत म्यांमार के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का दमन करने के लिए सैन्य सरकार की आलोचना करने वाले सबसे पहले देशों में शामिल रहा है. लेकिन अब वह इस डर से अपने पुराने रुख से हट रहा है कि कहीं म्यांमार चीन की झोली में न चला जाए और उसके तेल और गैस के संसाधनों तक भारत की पहुंच खत्म हो जाए.

भारत को अपने पूर्वोत्तर राज्यों में अलगाववादियों पर नियंत्रण कसने के लिए भी म्यांमार की जरूरत है. दोनों देश सीमापार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए भी मिल जुल कर काम कर रहे हैं. लैंड वेलफेयर स्टडीज के गुरमीत कंवल कहते हैं, "भारत का राष्ट्रीय हित मजबूत और स्थायी म्यांमार से ही जुड़ा है. म्यांमार भी चीन और भारत को तटस्थ रूप से देखता है." लेकिन थान श्वे की भारत यात्रा का मकसद व्यापार, निवेश और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने से कहीं ज्यादा है.

म्यांमार में इस साल चुनाव होने हैं जिनमें लोकतंत्र समर्थक नेता आउंग सान सू ची और कई दूसरे नेताओं के हिस्सा लेने पर रोक है. म्यांमार को इस मुद्दे पर दुनिया भर की कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है. थान श्वे अपनी पांच दिवसीय यात्रा के जरिए चाहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत इन चुनावों को मान्यता दिलाने में अपनी भूमिका अदा करे, खास कर ऐसे समय में जब म्यांमार के दुनिया में बहुत की कम दोस्त दिखते हैं. हालांकि जानकार मानते हैं कि भारत इस बारे में सीधे सीधे तो कोई कदम नहीं उठाएगा.

उधर भारत में कई लोकतंत्र समर्थक संगठन थान श्वे की यात्रा का विरोध कर रहे हैं. सू ची की मां 1960 के दशक में भारत में म्यांमार की राजदूत थी. भारत में रह कर ही सू ची ने स्कूल और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई की. इसलिए भारत में भी उनके बहुत से चाहने वाले हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः आभा एम