1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

म्यांमार और बांग्लादेश में रोहिंग्या डील

रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी के लिए बांग्लादेश और म्यांमार के बीच संधि हो गई है. संधि के मुताबिक रोहिंग्या वापस म्यांमार लौटेंगे. लेकिन वहां उन्हें सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?

यांगोन में म्यांमार और बांग्लादेश के अधिकारियों की मुलाकात के दूसरे दिन दोनों देशों ने एक एमओयू पर दस्तखत किये. समझौते के मुताबिक म्यांमार से भागकर बांग्लादेश पहुंचे रोहिंग्या वापस लौटेंगे.

म्यांमार के श्रम, आप्रवासन और जनसंख्या मंत्रालय के सचिव मिंत क्याइंग ने कहा, "जैसे ही बांग्लादेश उन्हें वापस भेजता है, वैसे ही हम उन्हें लेने के लिए तैयार हैं." मिंत ने साफ किया कि म्यांमार उन्हीं रोहिंग्याओं को वापस लेगा जो रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरेंगे और अपनी पूरी जानकारी देंगे.

समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले बांग्लादेश के विदेश मंत्री एएच महमूद अली ने कहा, "यह पहला कदम है. अब हमें काम शुरू करना होगा. एमओयू में सारी डिटेल्स हैं. ढाका पहुंचने के बाद हम ये डिटेल्स देंगे."

Bangladesch Außenminister Gabriel Besuch Flüchtlingslager in Kutupalong (Imago/photothek/U. Grabowsky)

बांग्लादेश के रोहिंग्या कैंप में पहुंचे जर्मनी विदेश मंत्री जिगमर गाब्रिएल

हालांकि दोनों पक्षों ने यह नहीं बताया कि रोहिंग्याओं की वापसी की प्रक्रिया के लिए कोई तारीख तय की गई है या नहीं. अली ने कहा "तीन महीने में नहीं. हमें एक प्रक्रिया शुरू करनी है. जिन घरों को फूंका गया है, जिन्हें जमींदोज कर दिया गया है, उन्हें फिर से बनाने की जरूरत है."

बांग्लादेश से सटे म्यांमार के रखाइन इलाके में रहने वाले बांग्ला भाषी लोगों को रोहिंग्या कहा जाता है. बौद्ध बहुल आबादी वाले म्यांमार ने रोहिंग्याओं को नागरिकता नहीं दी है. रोहिंग्या आबादी आम तौर पर मुस्लिम बहुल है. लेकिन वहां कुछ रोहिंग्या हिन्दू भी रहते हैं.

इसी साल अगस्त में रोहिंग्या चरमपंथियों ने रखाइन में म्यांमार सेना की कई चौकियों पर हमला किया. हमले के बाद सेना ने चरमपंथियों के खिलाफ अभियान छेड़ा. मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि म्यांमार की सेना ने आम लोगों को भी निशाना बनाया. सेना के भय से अगस्त के अंत से अब तक 6,00,000 से ज्यादा रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश पहुंच चुके हैं. बांग्लादेश में पहले से लाखों रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं.

रोहिंग्याओं के मुद्दे पर म्यांमार को अंतरराष्ट्रीय समूह की नाराजगी झेलने पड़ी है. संयुक्त राष्ट्र समेत कई पश्चिमी देश म्यांमार की आलोचना कर चुके हैं. बुधवार को अमेरिका ने कहा कि म्यांमार की सेना का अभियान "जातीय सफायी" जैसा है. हालांकि म्यांमार में तैनात रूस के राजदूत निकोलाय लिस्तोपादोव ने इस पर आपत्ति जताई और कहा, "मुझे नहीं लगता कि इससे समाधान खोजने में मदद मिलेगी. इससे उल्टा भी हो सकता, इससे हालात और भड़क सकते हैं." चीन का कहना है कि वह इस मुद्दे पर म्यांमार और बांग्लादेश के संपर्क में है.

(दुनिया में कहां कहां बसे हैं रोहिंग्या मुसलमान)

ओएसजे/आईबी (डीपीए, एपी, रॉयटर्स)

 

DW.COM

संबंधित सामग्री