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दुनिया

मौत की चपेट से लौटी अमेरिकी नर्स

अमेरिका की 59 वर्षीय नर्स नैन्सी राइटबोल लाइबेरिया में लोगों का इलाज करते हुए इबोला संक्रमण का शिकार हो गयी. अमेरिका ले जा कर उनका इलाज किया गया. इबोला से खतरनाक मुलाकात के अनुभव उन्होंने डॉयचे वेले से साझा किये.

डॉयचे वेले: लाइबेरिया में आपको पहली बार बीमारी का एहसास कब और कैसे हुआ?

नैन्सी राइटबोल: शुरुआत में मुझे मलेरिया जैसा लगा. बस बहुत तेज बुखार था और कुछ भी नहीं. थोड़ा बहुत सरदर्द था लेकिन मलेरिया में भी ऐसा होता है. इसलिए मैंने मलेरिया का टेस्ट करा लिया और वह पॉजिटिव निकला. मैं घर गयी और मलेरिया की दवा लेने लगी. चार दिन तक ऐसा ही चला लेकिन मैं बेहतर महसूस नहीं कर रही थी. फिर मेरे डॉक्टर ने कहा, "नैन्सी, मैं तुम्हारा इबोला का टेस्ट करना चाहता हूं. मुझे नहीं लगता कि यह इबोला है क्योंकि तुम में बीमारी के और कोई लक्षण नहीं हैं, लेकिन एक बार टेस्ट हो जाए तो हम सब तसल्ली कर सकते हैं." उन्होंने टेस्ट किया और शाम को रिजल्ट आ गया, पॉजिटिव.

आपकी हालत काफी गंभीर हो गयी थी. क्या आप पूरा समय होश में रहीं?

मैं बार बार होश में आती रही. मेरे पति डेविड ने बताया कि ऐसे भी दिन होते थे जब मैं उठ कर बैठती थी, कुछ देर उनसे बातें करती थी, थोड़ा बहुत खा भी लेती थी. मुझे ये सब याद भी नहीं. इतना याद है कि मैं बहुत सोई हूं. ज्यादातर मैं उठ नहीं पाती थी. डॉक्टर और नर्स को मदद करनी पड़ती थी. दिन पर दिन मैं और कमजोर होती जा रही थी.

आप उन चुनिंदा लोगों में से हैं जिन्हें प्रयोग के तौर पर जीमैप सिरम दिया गया. क्या इससे आपको कोई दिक्कत हुई?

उस वक्त मैंने खुद से पूछा: क्या मैं वाकई यह दवा लेना चाहती हूं? अब तक किसी पर भी यह टेस्ट नहीं की गयी है, इसे ले कर क्या होगा? लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर मैंने यह ली और मैं ठीक हो गयी तो अच्छा ही होगा. और अगर इस दवा को लेने के बाद कहीं मैं मर गयी, तब भी ठीक है क्योंकि बिना दवा के भी शायद मैं मर ही जाती.

अगस्त की शुरुआत में आपको हवाई जहाज द्वारा इलाज के लिए अमेरिका ले जाया गया. अपनी उस यात्रा के बारे में आपको कुछ याद है?

जब मुझे जहाज में चढ़ाया गया और मैंने अपने पति को अलविदा कहा, तब मेरे मन में यही चल रहा था कि पता नहीं मैं उन्हें दोबारा देख भी पाऊंगी. मैं बेहद बीमार थी और मैं नहीं जानती कि डॉक्टरों को उस वक्त यात्रा के दौरान मेरे जिंदा रहने का भी भरोसा था. मुझे वह नर्स याद है जिसने मेरी देखभाल की, वह डॉक्टर याद है जिसने मेरा चेहरा अपने हाथ में ले कर कहा, "नैन्सी हम तुम्हें घर ले जा रहे हैं, हम तुम्हारा बहुत अच्छे से ख्याल रखेंगे."

Nancy Writebol

फिर लाइबेरिया जाने को तैयार नर्स नैन्सी राइटबोल

और फिर जब आप ठीक होने लगीं..

मुझे वह दिन याद है जब डॉक्टर ने मुझे आ कर बताया कि मेरे टेस्ट के कुछ नतीजों में इबोला नहीं मिला है. उस वक्त मेरे मुंह से बस इतना निकला, "भगवान का शुक्र है." मैं बहुत उत्साहित हो गयी थी और अपने बच्चों, अपने नाती पोतों के बारे में सोचने लगी. वह एक पल जिंदगी की तरफ आपका नजरिया बदल देता है.

जब आप सामान्य जीवन में लौटीं, तब लोगों का रवैया कैसा रहा, क्या वे आपसे डरने लगे?

मेरी जान पहचान के कुछ लोग हैं, जिन्होंने मुझसे मिल कर अपने हाथ खड़े कर दिए. पहली बार जब ऐसा हुआ तो मुझे बहुत अजीब लगा. फिर लाइबेरिया में काम कर रहे भाइयों और बहनों की याद आई. उनके साथ भी ऐसा ही होता है. खास तौर से जो लोग अस्पतालों में काम कर रहे हैं या फिर जो लोगों को दफनाने का काम करते हैं. उनके तो घर वाले ही कह देते हैं कि घर मत आना, रात कहीं और गुजार लेना. क्योंकि उन्हें डर लगता है.

इबोला का इलाज हो जाने का मतलब अब आप काफी हद तक वायरस से इम्यून हो गयीं हैं. क्या अब आप दोबारा लाइबेरिया जाना चाहेंगी?

हां, बिलकुल. लेकिन डॉक्टरों ने मुझे कहा है कि जब मैं वहां जाऊं तो सुरक्षा सूट पहन कर रखूं क्योंकि उन्हें भी नहीं पता कि यह प्रतिरोध कब तक रहेगा. मुझे लगता है कि वापस जाना जरूरी है, इसके बारे में बात करना जरूरी है. ताकि पश्चिम अफ्रीका तक दवाएं पहुंचाई जा सकें, लोगों की मदद की जा सके.

इंटरव्यू: रिचर्ड वॉकर/आईबी

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