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दुनिया

मोहम्मद युनूस अदालत में पेश

बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस 2007 के एक मानहानि वाले मुकदमे के सिलसिले में मंगलवार को अदालत में पेश हुए. उनके ग्रामीण बैंक के खिलाफ भी सरकारी जांच चल रही है.

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इस मुकदमे को माइक्रो फाइनैंस के जनक समझे जाने वाले यूनुस के लिए एक और कानूनी मुसीबत माना जा रहा है. पिछले सप्ताह सरकार ने यूनुस के ग्रामीण बैंक में जांच के आदेश दिए थे. नॉर्वे की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म में आरोप लगाया गया था कि ग्रामीण बैंक ने नॉर्वे से मिली वित्तीय सहायता का दुरुपयोग किया.

नॉर्वे की एक जांच में युनूस को दोषमुक्त कर दिया गया लेकिन उसके बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने उन पर आरोप लगाया है कि वे टैक्स से बचने के लिए तिकड़म करते हैं. यूनुस और ग्रामीण बैंक को 2006 में संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार मिला था. माइक्रो फाइनैंस बैंक पड़ोसी भारत में भी भारी ब्याज दर और मुनाफाखोरी के लिए आलोचना के केंद्र में हैं.

Flash-Galerie Friedensnobelpreisträger 2006 Muhammad Yunus und Grameen Bank

पिछले दिनों में प्रधानमंत्री शेख हसीना और मोहम्मद यूनुस के संबंधों में खटास के संकेत हैं. दोनों के बीच पहला विवाद 2007 में हुआ था जब यूनुस ने अपनी पार्टी बनाई थी, जो ज्यादा दिनों तक चली नहीं. उसी साल यूनुस ने एक साक्षात्कार में कहा था कि बांग्लादेश की राजनीति धन बनाने के लिए सत्ता का मामला है. उसके बाद एक छोटी वामपंथी पार्टी जातीय समाजतांत्रिक दल के एक निम्न स्तरीय अधिकारी ने उन पर मानहानि का मुकदमा कर दिया था. यह पार्टी प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी पार्टी की सहयोगी है.

यह मामला 2007 से ठप्प पड़ा था लेकिन अब राजधानी ढाका से 100 किलोमीटर दूर मैमनसिंह की अदालत ने उन्हें पेश होने को कहा. यूनुस दस मिनट के लिए अदालत में पेश हुए जिसके बाद उन्हें जमानत दे दी गई. अदालत ने उन्हें मुकदमे के दौरान पेश होने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करने की अनुमति दे दी. उनके वकील ने दलील दी थी कि वे एक अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व हैं और उनके लिए हर दिन अदालत में पेश होना संभव नहीं होगा.

पुलिस ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस की एक झलक पाने के लिए 500 से अधिक लोग अदालत के सामने जमा हो गए थे. वह बांग्लादेश में बहुत लोकप्रिय हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: ए कुमार