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खेल

मोहन बगान पर प्रतिबंध की तलवार

राजनीतिक चेतना और कला संस्कृति के लिए विख्यात बंगाल के दर्शकों ने एक बार फिर खेल में बवाल मचाया है. दर्शकों की करतूत भारत के सबसे मशहूर फुटबॉल क्लबों में से एक मोहन बगान को भुगतनी पड़ सकती है.

भारत के मशहूर फुटबॉल क्लब मोहन बगान पर तीन साल के लिए देश की सबसे बड़े लीग में खेलने पर पाबंदी लगने के आसार हैं. टीम ने कोलकाता में एक मैच के दौरान भीड़ के साथ हुई हिंसा में एक खिलाड़ी के घायल होने पर खेलने से मना कर दिया था.

रविवार को कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में कड़े प्रतिद्वंद्वी ईस्ट बंगाल के साथ मुकाबले में मोहन बगान की टीम एक गोल से पीछे चल रही थी. अचानक मोहन बगान के समर्थकों से भरे स्टैंड से उछाला गया पत्थर क्लब के मिडफील्डर सैयद रहीम नबी को लगा और उनका जबड़े का दायां हिस्सा जख्मी हो गया. कहा जा रहा है कि पत्थर रेफरी को लक्ष्य बना कर फेंका गया था जो नबी को जा लगा. नबी को इलाज के लिए भेजा गया और हादसे के 13 मिनट बाद ही खेल दोबारा शुरू करने की स्थिति बन गई लेकिन तब मोहन बगान ने खेलने से मना कर दिया.

उसके बाद फुटबॉल प्रेमी दर्शकों ने जम कर बवाल मचाया. कोलकाता पुलिस के मुताबिक इस हंगामे में सात पुलिसकर्मियों समेत 45 लोग घायल हुए हैं. दर्शकों ने ट्रैफिक जाम कर दिया और स्टेडियम के बाहर मौजूद गाड़ियों पर पथराव किया. मैच देखने के लिए 1 लाख की क्षमता वाले स्टेडियम में करीब 85,000 दर्शक मौजूद थे. बवाल बहुत ज्यादा बढ़ सकता था लेकिन पुलिस ने इस पर जल्दी ही काबू कर लिया. घायल होने वालों में बिधाननगर पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार भी हैं जिनके चेहरे पर चोट आई है. इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में भी लिया गया है.

भारत की सबसे बड़ी लीग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनंदो धर ने बताया, "हाफ टाइम तक खेलने वाली मोहन बगान की टीम को मौजूदा सत्र और अगले दो सत्रों के लिए निलंबित किया जा सकता है." 15 दिसंबर को लीग का अगला मैच खेला जाना है और उम्मीद की जा रही है कि इससे पहले इस बारे में फैसला कर लिया जाएगा.

1980 की याद

रविवार की हिंसा ने लोगों के जेहन में 32 साल पुराने ईडेन गार्डेन में मचे बवाल की याद ताजा कर दी है जिसमें 16 फुटबॉल प्रेमी मारे गए कई लोग घायल हुए थे. 16 अगस्त 1980 को मोहन बगान और ईस्ट बंगाल डर्बी के बीच मुकाबले में यह बवाल मचा था.

इस रविवार के मुकाबले में मोहन बगान के दर्शक मैच के रेफरी से नाराज थे. रेफरी ने मोहन बगान के स्टार खिलाड़ी ओकोली ओदाफा को बाहर जाने के आदेश दे दिया था. इसके बाद दर्शकों ने वहां पथराव शुरू कर दिया इन्हीं में से एक पत्थर नबी को जा लगा.

हैरत की बात यह है कि भारी सुरक्षा के बावजूद दर्शक अपने साथ चोरी छिपे पत्थर मैदान में ले जाने में कामयाब हो गए. बिधाननगर पुलिस का कहना है कि दर्शकों के बीच मौजूद असामाजिक तत्वों ने मैदान में मौजूद कंक्रीट की दीवारों को तोड़ दिया और उनके टुकड़ों को मिसाइल की तरह इस्तेमाल किया. 1980 के बवाल को देख चुके एक दर्शक अरूप बासू ने कहा, "जिस तरह की स्थिति थी उसमें 1980 जैसा बवाल मच सकता था."

बंगाल के दर्शक दूसरे खेलों में भी कई बार अपना आपा खो चुके हैं. 1996 में क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान भारत श्रीलंका के बीच सेमीफाइनल मैच में भी यही हुआ जब दर्शकों ने भारत के खराब प्रदर्शन पर ऐसा बवाल मचाया कि मैच बीच में ही रोकना पड़ा. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड और खुद बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन पर भी स्थानीय दर्शकों को बवाल से दूर रहने की कई बार हिदायत दे चुका है यहां तक ऐतिहासिक स्टेडियम ईडेन गार्डेन से अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी छीनने की धमकी भी दी जा चुकी है.

बंगाल संस्कृति, राजनीतिक चेतना और मीठे बोल के लिए जाना जाता है पर खेल को लेकर उनकी दीवानगी कई बार सीमाएं लांघ जाती है.

एनआर/एएम(पीटीआई,एएफपी)

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