1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

मोबाइल पर तबीयत देखेगा डॉक्टर

कैसा होगा अगर आप अपने घर में बैठे हों, मोबाइल पर एक डॉक्टर ऑनलाइन हो जो आपकी तबीयत के बारे में पूछे. बहुत जरूरत होने पर ही अस्पताल जाने की जरूरत पड़े. क्या आप ऐसे आभासी डॉक्टर के बारे में सोच सकते हैं.

शर्ले सिल्वर्स नाम की एक मरीज सेंट्रल लंदन में रहती हैं. उन्हें ऐसे डॉक्टर बहुत पसंद हैं "ऐसा लगता है कि डॉक्टर मेरे साथ सोफे पर बैठे हैं." 60 साल की सिल्वर्स को फेफड़े की बीमारी है. वह मोबाइल पर अपने डॉक्टर को बताती हैं कि उनके शरीर का तापमान क्या है, ऑक्सीजन का स्तर क्या है और स्पेक्ट्रम का रंग क्या है. शरीर में संक्रमण की स्थिति को बताने वाला एक बैरोमीटर है, जिसमें संक्रमण की गंभीरता के हिसाब से रंग बदलता है. वह हर दिन डॉक्टर को इसके बारे में रिपोर्ट देती हैं.

वह आंकड़े ईमेल या एसएमएस कर देती हैं और कुछ ही मिनटों में उन्हें जवाब मिल जाता है. इस कारण डॉक्टर को भी रोज रोज मरीज के पास नहीं जाना पड़ता और मरीज को भी अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ते.

इस तरह इलाज करने वालों को ब्रिटेन में वर्चुअल डॉक्टर कहा जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्री जेरेमी हंट भी इससे काफी उत्साहित हैं. उन्होंने नवंबर में ही टेलीहेल्थकेयर सिस्टम को एक लाख लोगों के लिए उपलब्ध करवाने की बात कही है. वह 2017 तक 30 लाख लोगों तक यह सेवा पहुंचाना चाहते हैं.

अमेरिका के बाद ब्रिटेन दूसरा ऐसा देश होगा जो इस प्रणाली का इस्तेमाल करेगा. इससे निश्चित ही तकनीक और टेलीकॉम कंपनियों को काफी मुनाफा होगा, कई अरब डॉलर का फायदा होने की संभावना है.

रिमोट मॉनिटरिंग उन लोगों के लिए बहुत अहम है जो गंभीर रूप से बीमार हैं लेकिन जिन्हें अस्पताल में रहने की वैसे जरूरत नहीं है. वह घर पर भी अपनी देखभाल कर सकते हैं. इस प्रणाली से अस्पताल के पैसे तो बचेंगे ही, मरीज का स्वस्थ रहना भी पक्का हो जाएगा. स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वह वर्चुअल डॉक्टर के जरिए पांच साल में करीब 1.2 अरब पाउंड (करीब 100 अरब रुपये) बचा सकता है.

बचत और कटौती के दौर में इतना धन बचाने का मौका कोई भी नहीं गंवाना चाहेगा. यूरोप में कुछ और देशों की सरकार भी इस बारे में विचार कर रही हैं. कई ऐसे विकल्प भी मौजूद हैं जो घर बैठे मरीज की हालत के बारे में पता कर सकता है. इसमें हेल्थ कंप्यूटर, स्मार्ट फोन एप्लीकेशन, वीडियो चेक अप शामिल हैं. जबकि कई और प्रोजेक्ट भी हैं जिसमें घरों में सेंसर लगाना जरूरी है ताकि मुख्य सर्वर पर मेडिकल रिकॉर्ड इकट्ठा किया जा सके.

कोई रामबाण दवा नहीं

टेलीहेल्थ के इस्तेमाल से अस्पतालों में आपातसेवा में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 20 फीसदी कम हो जाएगी और मृत्युदर में भी 45 फीसदी तक कमी आ सकती है. हालांकि यह कमियां तुलनात्मक हैं. जब जून में पूरे नतीजे पेश किए गए तो मरने वालों की संख्या काफी कम सामने आई. यह सिर्फ 3.7 फीसदी ही थी. 12 महीने जिन 3000 मरीजों पर नजर रखी गई उनमें से 59 लोगों ही जान बचाई जा सकी.

ब्रिटिश मेडिकल जरनल में शोधकर्ताओं को मुताबिक इसके इस्तेमाल से होने वाले सकारात्मक परिणाम और बचत अस्पष्ट थी. वहीं दूसरे शोध में मिलाजुला नतीजा सामने आया.

कुछ रिसर्च में सिर्फ एक ही बीमारी पर नजर रखी गई. और सामने आया कि दिल की बीमारी या मधुमेह से पीड़ित मरीजों को टेलीहेल्थ से फायदा हो सकता है.

हालांकि मोबाइल तकनीक अब काफी सस्ता है और मरीजों की घर पर नजर रखने के लिए तकनीक अच्छी भी है. इलाज के लिए उपकरण बनाने वाली कई कंपनियां उस मार्केट के बारे में सोच रही हैं जिसके बारे में बात तो 20 साल से की जा रही है लेकिन इसमें गति अब दिखाई पड़ने लगी है.

इसके पूरे नतीजे अभी साफ नहीं है लेकिन टेलीहेल्थ कंपनियां पूरी कोशिश कर रही हैं यह गिनाने की कि इससे खर्च कितना कम हो सकता है.

एएम/एजेए (रॉयटर्स)

DW.COM

संबंधित सामग्री