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दुनिया

मोदी मैर्केल ने देखा जर्मन कौशल विकास केंद्र

भारत यात्रा के दूसरे दिन चांसलर अंगेला मैर्केल ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बंगलुरु में जर्मन कंपनी बॉश के प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया. उन्होंने जर्मनी और भारत के कारोबारियों की बैठक में भी हिस्सा लिया.

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भारत को ट्रेनिंग देता जर्मनी

प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मनी की मशीन टूल्स बनाने वाली कंपनी बॉश के व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र के सामने चांसलर अंगेला मैर्केल का स्वागत किया. उसके बाद दोनों नेताओं ने बॉश की प्रशिक्षण सुविधाओं का मुआयना किया. भारत नौकरी के लायक कुशल कामगारों की भारी कमी झेल रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने कौशल विकास को अपनी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बनाया है और इसके लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय भी बनाया है. जर्मनी के व्यावसायिक प्रशिक्षण के सिस्टम का रोजगार से जुड़े होने के कारण काफी नाम है.

बॉश कंपनी का जर्मनी के बाहर भारत में सबसे बड़ा डेवलपमेंट सेंटर है. देश भर में बॉश के 14 कारखानों में 29,000 लोग काम करते हैं. बॉश का प्रशिक्षण केंद्र भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और कंपनी के अनुसार उसे 50 बार पुरस्कृत किया गया है.

मंगलवार सुबह मैर्केल और मोदी ने भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के संगठन नासकॉम द्वारा आयोजित कारोबारियों के एक सम्मेलन में हिस्सा लिया. जर्मनी अपने इंडस्ट्री 4.0 प्रोजेक्ट के लिए भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग का सहयोग चाहता है. इंडस्ट्री 4.0 इंसान और मशीन के आपसी संवाद के बाद अब मशीन और मशीन के बीच आपसी संवाद की परियोजना है. इसे चौथी औद्योगिक क्रांति का नाम दिया जा रहा है, जिसमें आईटी के जरिए दो अलग अलग मशीनों में संवाद और समन्वय संभव होगा.

बंगलुरु को न सिर्फ भारत का सिलिकन वैली माना जाता है, यहां जर्मनी की बॉश, एसएपी, सीमेंस और डाइम्लर जैसी कंपनियों का दफ्तर भी है. भारत में इस समय 1700 जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं और उनमें से कई ने भारत में अपना कारखाना भी खोला है. भारत और जर्मनी का सालाना कारोबार 2014 में 16 अरब यूरो का था. भारत मेक इन इंडिया अभियान में जर्मनी का सहयोग चाहता है. दोनों देशों ने सोमवार को नई दिल्ली में सरकारी परमर्शी बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, भारत के सौर ऊर्जा कार्यक्रम के लिए जर्मन ऋण और जर्मन कारोबार को आसान बनाने के कई समझौतों पर दस्तखत किए.

एमजे/ओएसजे (डीपीए)

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