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दुनिया

मोदी ने सार्क में 26/11 को याद किया

मुंबई के आतंकी हमलों की छठीं बरसी के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्क सम्मेलन के दौरान संबोधन में कहा कि अभी भी भारत इन हमलों में मारे गए लोगों के लिए अंतहीन दर्द महसूस करता है.

मोदी ने काठमांडू में सार्क नेताओं से अपील की है कि आतंक के विरुद्ध लड़ाई सब मिल कर करें. 18वीं दक्षेस शिखर वार्ता में उन्होंने भारत आने वालों के लिए तीन से पांच साल के बिजनेस वीजा और मरीजों और उसके साथ एक व्यक्ति के लिए तुरंत चिकित्सा वीजा की घोषणा करते हुए कहा, "आज हम मुंबई 2008 के भयावह आतंकी हमलों को जब याद करते हैं तो इन हमलों में मारे गए लोगों के प्रति अंतहीन दर्द हमें महसूस होता है. आतंक से लड़ने और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से लड़ने के लिए जो हमने प्रतिबद्धता ली है उसे पूरा करने के लिए साथ मिल कर काम करें."

दक्षेस शिखर वार्ता में शामिल होने वाले देशों में भारत, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान के अलावा पाकिस्तान भी है. मोदी ने कहा कि अच्छा पड़ोसी होना वैश्विक चाह है, "अगर हम एक दूसरे की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील हैं और अपने लोगों के जीवन को लेकर भी, तो हम दोस्ती गहरी करेंगे, सहयोग तेज करेंगे और अपने इलाके में स्थिरता को बढ़ाएंगे."

उधर मुंबई में मृतकों की याद में पुष्पांजलि अर्पित की गई. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "मैं उन सभी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने मुंबई की सुरक्षा के लिए 26/11 के दिन अपनी जान दी. हम पुलिस को और बेहतर हथियारों से मुहैया करवाएंगे, यह हमारी प्राथमिकता है."

26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकवादी समुद्री रास्ते से मुंबई में घुसे और लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं. इसमें 166 लोग मारे गए जिसमें 18 पुलिसकर्मी भी शामिल थे. उस समय आतंक निरोधी दस्ते के प्रमुख हेमंद करकरे, मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, मुंबई से एसीपी अशोक कामटे सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विजय सालसकर भी आतंकी हमलों में मारे गए.

छह साल पूरे हो जाने के बावजूद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को यह कहने की जरूरत पड़ रही है कि पुलिस को बेहतरीन हथियार मुहैया करवाए जाएंगे.

आतंकवाद के मुद्दे पर सार्क देशों की बैठक में एक बार फिर पाकिस्तान और भारत के बीच तनातनी का मुद्दा उठा. नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबुलाल भट्टाराई ने रिपब्लिका नाम के अखबार में लिखा, "इस संगठन में पाकिस्तान और भारत के बीच विवाद का मुद्दा अक्सर छाया रहा है. अब समय है कि भारत इसमें आगे बढ़े."

वहीं पाकिस्तान के नवाज शरीफ ने कहा, "क्षेत्र के लिए मेरा नजरिया है विवाद रहित एशिया जहां एक दूसरे से लड़ने की बजाए हम एक साथ गरीबी से लड़ें." रिपोर्टरों से शरीफ ने कहा, "अब गेंद भारत के पाले में है." नेपाल इकोनॉमिक फोरम के चेयरमैन संजीव शुक्ला ने कहा, "सार्क की मुख्य समस्या यह है कि यह भारत और पाकिस्तान के ही बारे में है और अब अफगानिस्तान का आयाम भी इसमें जुड़ गया है."
वहीं मोदी ने कहा है कि भारत क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ाने के लिए नेतृत्व लेंगे और सीमा पार सामान भेजने को वह आसान बनाएंगे.

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